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Lok Sabha Election: छठे चरण में जिन 58 सीटों पर हैं चुनाव, उनमें 48 पर NDA का कब्जा, इस बार ये चार राज्य तय करेंगे BJP की राह

Lok Sabha Election 2024 6th Phase: छठे चरण के तहत 25 मई यानी शनिवार को देश के 8 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की 58 लोकसभा सीटों पर मतदान होगा। पिछले लोकसभा चुनाव में इन 58 सीटों पर भाजपा को अकेले 40 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। वहीं, घटक दलों को मिला दिया जाए तो 58 लोकसभा सीटों में 46 पर एनडीए के सांसद हैं।

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Lok Sabha Polls

Photo : Twitter

Lok Sabha Election 2024 6th Phase: लोकसभा चुनाव के छठे चरण के तहत 25 मई यानी शनिवार को देश के 8 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की 58 लोकसभा सीटों पर मतदान होगा। छठे चरण का यह लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए कई मायनों में अहम माना जा रहा है। दरअसल, भाजपा अकेले 370 और एनडीए गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ 400 पार के मिशन के साथ चुनाव लड़ रही है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पार्टी की नजरें खासतौर से उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों पर टिकी हुई हैं जहां सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है।

केंद्र में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के मिशन में जुटी भाजपा छठे चरण की चुनाव वाली सीटों पर जहां एक तरफ बिहार, दिल्ली, हरियाणा और झारखंड में 2019 में हुए पिछले लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को दोहराना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ ओडिशा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार सीटों की संख्या बढ़ाने की पुरजोर कोशिश कर रही है।

58 में से 46 पर NDA के सांसद

पिछले चुनाव के नतीजों की बात करें तो इन 58 लोकसभा सीटों में से भाजपा को अकेले 40 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। बाद में हुए उपचुनाव में भाजपा ने सपा को हराकर आजमगढ़ लोकसभा सीट भी छीन ली। इस तरह से 41 लोकसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा हो गया। एनडीए गठबंधन के घटक दलों की बात करें तो जेडीयू के पास 3 और एलजेपी एवं आजसू के पास इनमें से 1-1 सीट है। यानी कुल मिलाकर देखा जाए तो इन 58 लोकसभा सीटों में 46 पर एनडीए के सांसद हैं। बिहार में जिन 8 सीटों और झारखंड में जिन 4 सीटों पर शनिवार को चुनाव होना है, ये सभी एनडीए गठबंधन की सीट हैं।

इन चार राज्यों पर रहेगी नजर

दिल्ली: लोकसभा चुनाव के छठे चरण में दिल्ली की सभी 7 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। इन सभी सीटों पर वर्तमान में बीजेपी का कब्जा है। इस बार बीजेपी ने 7 में से छह लोकसभा सीट पर मौजूदा सांसदों के टिकट काट दिए हैं। सिर्फ उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद मनोज वाजपेयी को फिर से मौका दिया गया है। हालांकि, आम और कांग्रेस के गठजोड़ के बीच बीजेपी के लिए 2019 के प्रदर्शन को दोहराना चुनौती भरा होगा।

हरियाणा: छठे चरण में हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों पर भी चुनाव होने हैं। पिछले चुनाव में भाजपा ने अकेले अपने दम पर हरियाणा की सभी 10 सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि, इस बार के समीकरण अलग हैं।

उत्तर प्रदेश: यूपी की जिन 14 लोकसभा सीटों पर शनिवार को चुनाव होना है, उसमें से 10 पर भाजपा और 4 पर बसपा के सांसद जीते थे। भाजपा इस बार बसपा के कब्जे वाली इन चारों लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करना चाहती है।

पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी के गढ़ पश्चिम बंगाल में में जिन 8 सीटों पर छठे चरण में चुनाव हो रहा है, उसमें से भाजपा के पास 5 और तृणमूल कांग्रेस के पास 3 सीट है। भाजपा का दावा है कि वह इस चरण में अपनी सीटें बढ़ाने में कामयाब होगी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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