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गठबंधन की राजनीति और अखिलेश के प्रयोग...पहले बसपा, फिर रालोद और अब कांग्रेस, क्या इस बार पार होगा यूपी का भंवर?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 17, 2024, 02:54 PM IST

बसपा ने इस बार अकेले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) लड़ने का फैसला किया है। ऐसे में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए(NDA) के रथ को रोकना सपा और कांग्रेस के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। इस बार मुकाबला और भी ज्यादा दिलचस्प हो सकता है क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में प्रभावशाली माना जाने वाला राष्ट्रीय लोकदल और पूर्वांचल में असरदार कही जाने वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी समेत कई पार्टियां इस बार राजग के हिस्से के रूप में सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए चुनौती पेश करेंगी।

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अखिलेश यादव

Photo : BCCL

Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 की रणभेरी बज चुकी है। 19 अप्रैल से वोटिंग शुरू हो जाएगी और इसी के साथ सियासत के महासमर की भी शुरुआत होगी। पूरे लोकसभा चुनाव में सभी दलों की नजर अगर किसी राज्य पर है, तो वह है उत्तर प्रदेश। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अपने 370 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश की 80 में से 80 सीटें जीतनी होंगी। हालांकि, बीजेपी के लिए लक्ष्य इतना आसान नहीं है, क्योंकि इस बार यूपी के चुनावी नतीजे चौंका सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक बार फिर सियासी एक्सपेरीमेंट किया है। इस बार उन्होंने बसपा के बजाय इंडिया गठबंधन के तहत कांग्रेस पार्टी से गठबंधन किया है। इसके तहत सपा उत्तर प्रदेश की 80 में से 62 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि कांग्रेस 17 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी। सपा ने भदोही की सीट इंडिया गठबंधन के तहत तृणमूल कांग्रेस को दी है। दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने सभी लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।

हर चुनाव में सपा का नया प्रयोग

समाजवादी पार्टी पिछले कुछ चुनावों से लगातार गठबंधन करती आ रही है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के साथ गठबंधन करके लड़ा था। इसके बाद साल 2019 का लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और रालोद के साथ गठबंधन किया। 2022 का विधानसभा चुनाव सपा ने रालोद, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल कमेरावादी तथा कुछ अन्य दलों के साथ गठबंधन करके लड़ा था।

कैसी रही गठबंधन की राजनीति

लोकसभा चुनावों की बात करें तो 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 73 पर जीत हासिल की थी। हालांकि, 2019 में सपा, बसपा और रालोद के इस गठजोड़ ने पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में कुछ सीटों पर भाजपा को टक्कर दी थी, लेकिन वह कोई बड़ा प्रभाव डालने में विफल रहा था। बसपा को 10 और सपा को पांच सीटों पर कामयाबी मिली थी जबकि रालोद का खाता नहीं खुल सका था। नतीजा यह हुआ कि भाजपा को नुकसान हुआ और उसे 62 सीटें ही मिल सकीं, जबकि उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) को दो सीटों पर कामयाबी हासिल हुई थी।

पश्चिमी क्षेत्र: उत्तर प्रदेश में 2019 के लोकसभा चुनाव पर क्षेत्रवार नजर डालें तो भाजपा को सबसे ज्यादा 23 सीटें राज्य के पश्चिमी हिस्से से मिली थीं। बसपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा और नगीना (एससी) सीटें जीती थीं जबकि सपा संभल, मुरादाबाद, मैनपुरी और रामपुर में विजयी हुई।

मध्य क्षेत्र: मध्य क्षेत्र में अमेठी और रायबरेली प्रमुख संसदीय क्षेत्र हैं। दोनों लंबे समय से कांग्रेस के गढ़ माने जाते रहे हैं। साल 2019 में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी रायबरेली सीट बरकरार रखी थी लेकिन उनके बेटे राहुल गांधी अमेठी सीट केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से हार गए थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ से जीते थे। बसपा ने मध्य क्षेत्र से अंबेडकर नगर के रूप में केवल एक सीट जीती थी। भाजपा ने इस क्षेत्र से 13 सीटें जीती थीं, जिसमें प्रतिष्ठित फैजाबाद लोकसभा सीट भी शामिल है।

पूर्वी क्षेत्र: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी राज्य के पूर्वी हिस्से की 30 सीटों में शामिल है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से बसपा ने पांच सीटें जीतीं थीं जबकि सपा ने आजमगढ़ के रूप में एक सीट और भाजपा के सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने दो सीटें जीती थीं।

बुन्देलखण्ड क्षेत्र: साल 2019 में बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भाजपा की जीत हुई थी। उसे झांसी, बांदा, हमीरपुर और जालौन-एससी की सभी चार लोकसभा सीटों पर कामयाबी मिली थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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