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लोकसभा चुनाव 2024 में इन 5 निर्दलीय उम्मीदवारों ने खींचा पूरे देश का ध्यान, जानें कहां कितनी दिलचस्प लड़ाई

Lok Sabha Chunav: इस बार के लोकसभा चुनाव में कुछ प्रत्याशियों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। इनमें बिहार से तीन, झारखंड के एक और राजस्थान के एक उम्मीदवार का नाम शामिल है। इनमें पवन सिंह, रविंद्र भाटी और जयराम महतो की खूब चर्चा हुई। आपको बताते हैं कहां कितना दिलचस्प मुकाबला है।

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इन 5 उम्मीदवारों ने बढ़ाई सरगर्मी।

Photo : Times Now Digital

5 Independent Candidates: लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे अब से कुछ ही देर बार साफ हो जाएंगे। किसकी सरकार बनेगी, किसकी उम्मीदों पर पानी फिरेगा... इस सभी सवालों के जवाब मतगणना के बाद मिल जाएंगे। सात चरण में हुए देश के अब तक सबसे लंबे लोकसभा चुनाव में वैसे तो कुल हजारों निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन कुछ प्रत्याशियों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। उनमें बिहार, झारखंड और राजस्थान के उम्मीदवार शामिल हैं।

1). बिहार की काराकाट सीट से पवन सिंह

कभी भारतीय जनता पार्टी से ताल्लुक रखने वाले भोजपुरी कलाकार पवन सिंह ने बिहार की काराकाट सीट से लोकसभा चुनाव में दमदार तरीके से दावेदारी पेश की। उन्होंने एनडीए में शामिल दल आरएलएसपी के उपेंद्र कुशवाहा और सीपीआई (एमएल) के खिलाफ चुनाव लड़ा। चुनाव प्रचार के दौरान जहां-जहां पवन सिंह की रैली हुई, वहां भीड़ का नजारा देखने लायक था।

2). राजस्थान की बाड़मेर सीट से रविंद्र सिंह भाटी

रविंद्र सिंह भाटी वर्तमान में राजस्थान के शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक हैं। उनका नाता भारतीय जनता पार्टी से भी रहा है, छात्रनेता के रूप में उन्होंने खूब सुर्खियां बंटोरी। लोकसभा चुनाव 2024 में भाटी ने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार सूबे की बाड़मेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश चौधरी के खिलाफ जोरदार चुनाव लड़ा और सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

3). बिहार की पूर्णिया सीट से पप्पू यादव

राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने लोकसभा चुनाव के ठीक पहले अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया था और खुद कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। उन्हें टिकट नहीं मिला तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। पप्पू यादव की लोगों में अच्छी पकड़ मानी जाती है। उन्होंने इस बार बतौर निर्दलीय उम्मीदवार आरजेडी की बीमा भारती और जेडीयू के संतोष कुमार के खिलाफ मजबूती से चुनाव लड़ा।

4). झारखंड की गिरिडीह सीट से जयराम महतो

गिरिडीह सीट की सियासी सरगर्मी उस वक्त बढ़ गई, जब छात्रनेता जयराम महतो ने अपनी दावेदारी पेश की। इस पूरे चुनाव में झारखंड की ये सीट हॉट सीट बनी रही। गिरिडीह में आजसू पार्टी के चंद्रप्रकाश चौधरी और जेएमएम के मथुरा प्रसाद महतो को जयराम महतो से कड़ी टक्कर मिली। महतो की रैलियों में बंपर भीड़ ने उनके विरोधियों की चिंता बढ़ा दी।

5). बिहार की सीवान सीट से हिना शहाब

मोहम्मद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब ने लोकसभा चुनाव 2024 में राष्ट्रीय जनता दल के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा। उनके इस फैसले ने खूब सुर्खियां बंटोरी और ये सवाल उठा कि क्या लालू यादव की पार्टी से उनकी कोई बड़ी नाराजगी है या फिर ये एक चुनावी रणनीति का हिस्सा है? उन्होंने आरजेडी के अवध बिहारी चौधरी और जेडीयू की विजयलक्ष्मी देवी की टेंशन में भरपूर इजाफा किया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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