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Lok Sabha Election Result 2019: लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों की वो 10 बड़ी बातें, जिसके चलते आज भी मजबूत है BJP

BJP, Lok Sabha Election Result 2019: क्या आप जानते हैं कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2019 के परिणामों में कौन-कौन से रिकॉर्ड कायम किए थे और किस 10 बड़ी बातों के चलते आगामी चुनाव 2024 में भाजपा के हौसले और बुलंद होते नजर आ रहे हैं। आखिर वो कौन से आंकड़े हैं और इसके क्या मायने हैं आपको समझाते हैं।

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2019 के चुनावी परिणाम से जुड़ी अहम बातें।

Photo : Times Now Digital

Lok Sabha Election Result 2019: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सभी सियासी पार्टियों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार 370 सीटों से अधिक पर जीत हासिल करने का लक्ष्य रखा है, साथ ही NDA के लिए 400+ का टारगेट सेट किया है। तो वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों का गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूसिव अलायंस ये दावा कर रही है कि वो इस बार मोदी सरकार को सत्ता के सिंहासन से उखाड़ फेंकेगा। हालांकि लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे भाजपा के हौसले को और बुलंद करते नजर आ रहे हैं।

लोकसभा चुनाव परिणाम 2019 की 10 प्रमुख बातें (2019 Lok Sabha Election in 10 Points)

1). भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2019 में साल 2014 से भी बड़ी और ऐतिहासिक जीत दर्ज की, भाजपा ने कुल 303 सीटों पर जीत दर्ज की।

2). लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों में भाजपा ने 10 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में सारी की सारी सीटों पर जीत दर्ज की थी।

3). पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 18 सीटें जीतकर इतिहास रचा। अब बंगाल में ममता बनर्जी के लिए भाजपा बहुत बड़ी चुनौती बन गयी है।

4). भारत की स्वतंत्रता के बाद यह दूसरा मौका था जब एक ही दल को लगातार दूसरी बार, पहले से अधिक बहुमत से जीत मिली हो।

5). लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम में भाजपा ने 12 प्रमुख और बड़े राज्यों में 50 प्रतिशत से भी अधिक वोट हासिल किए।

6). भाजपा ने 5 सालों में 10 फीसदी वोट का इजाफा किया। 2019 में भाजपा का मत-प्रतिशत 41% हो गया, जो 2014 के 31% से 10% अधिक था।

7). भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के 9 पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे कई दिग्गजों को पटखनी दी थी।

8). 2019 में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में भी सपा-बसपा-गठबंधन की चुनौती को ध्वस्त कर दिया और 80 में से 62 सीटों पर जीत दर्ज की।

9). भाजपा ने जहां प्रचंड जीत हासिल की तो कांग्रेस को 18 राज्यों में एक भी सीट नहीं मिली। वहीं बिहार में लालू यादव की RJD का खाता तक नहीं खुला।

10). लोकसभा चुनाव में भाजपा ने वंशवाद की राजनीति पर प्रहार करने का दावा किया था। चुनावी परिणाम में गांधी परिवार, सिंधिया परिवार, मुलायम परिवार, लालू परिवार, चौधरी चरण सिंह परिवार, हुड्डा परिवार, चौटाला परिवार, देवेगौड़ा परिवार आदि को भारी धक्का लगा था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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