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यूपी और बिहार की इन 22 सीटों पर टिकी सबकी निगाहें, जानें छठे चरण की हर सीट की अहमियत और समीकरण

Election News:उत्तर प्रदेश की 14 और बिहार की 8 सीटों पर लोकसभा चुनाव के छठे चरण में वोटिंग होगी। इन 22 सीटों पर होने वाले मतदान से पहले हर किसी का ध्यान इस ओर जा रहा है। चुनावी नजरिये से यूपी-बिहार की अहमियत हर कोई समझता है। आपको हर सीट का समीकरण समझाते हैं।

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यूपी बिहार के लिए कितना अहम है छठा चरण?

Photo : Times Now Digital

6th Phase Polling: लोकसभा चुनाव 2024 के छठे दौर की वोटिंग का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। देशभर के आठ राज्यों समेत केंद्र शासित प्रदेश की 58 सीटों पर मतदान होने हैं। इनमें उत्तर प्रदेश और बिहार की 22 सीटों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इसकी वजह ये है कि इस फेज में यूपी की आजमगढ़, इलाहाबाद, सुलतानपुर जैसी सीटों पर चुनाव होने हैं, तो बिहार की गोपालगंज, वैशाली जैसी सीटों पर मतदान होंगे। आपको दोनों राज्यों का सारा गणित समझाते हैं।

14 सीटों पर 162 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा के अनुसार 14 लोकसभा सीट पर 146 पुरुष और 16 महिलाओं सहित कुल 162 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि गैसड़ी विधानसभा सीट पर सात उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इन सभी सीट पर बृहस्पतिवार शाम छह बजे चुनाव अभियान समाप्त हो गया और 25 मई को सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक मतदान होगा।

बिहार की 8 सीटों पर 86 उम्मीदवारों की दावेदारी

बिहार की आठ लोकसभा सीट के लिए भी चुनाव प्रचार का सिलसिला खत्म हो गया। इन सीट पर मतदान 25 मई को होना है। 25 मई को होने वाले मतदान में लगभग 1.5 करोड़ मतदाता 86 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे।

यूपी की किन 14 लोकसभा सीटों पर होंगे मतदान?

  1. सुलतानपुर
  2. प्रतापगढ़
  3. फूलपुर
  4. इलाहाबाद
  5. आंबेडकर नगर
  6. श्रावस्ती
  7. डुमरियागंज
  8. बस्ती
  9. संत कबीर नगर
  10. लालगंज (अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित)
  11. आजमगढ़
  12. जौनपुर
  13. मछलीशहर (अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित)
  14. भदोही

आम चुनाव के छठे चरण के लिए राज्य की इन 14 लोकसभा सीटों पर प्रचार सभी की निगाहें टिकी हैं। वो कहते हैं न दिल्ली का रास्ता यूपी से ही होकर जाता है, ऐसे में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में हर एक की अहमियत को कम नहीं आंका जा सकता है। राज्य में लोकसभा चुनावों के साथ-साथ बलरामपुर की गैसड़ी विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 25 मई को मतदान होना है।

बिहार की किन 8 लोकसभा सीटों पर होंगे मतदान?

  1. वाल्मिकीनगर
  2. पश्चिम चंपारण
  3. पूर्वी चंपारण
  4. शिवहर
  5. सीवान
  6. महाराजगंज
  7. वैशाली
  8. गोपालगंज

प्रचार के आखिरी दिन बिहार में रैलियों का रेला

NDA के स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिन इस चरण की सीट में से पूर्वी चंपारण और महाराजगंज निर्वाचन क्षेत्रों में रैलियां कीं। भाजपा ने राधा मोहन सिंह को पूर्वी चंपारण से उम्मीदवार बनाया है, तो वहीं महाराजगंज सीच से जनार्दन सिंह सिग्रीवाल चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, विपक्षी खेमे में राजद के युवा नेता तेजस्वी यादव ने अपना अथक अभियान जारी रखा और पीठ पर चोट होने के बावजूद बेल्ट बांधकर व्हीलचेयर के सहारे रैलियों को संबोधित किया। इसके साथ ही कांग्रेस के किसी भी शीर्ष नेता ने बिहार में छठे चरण के लिए प्रचार नहीं किया जबकि पश्चिम चंपारण और गोपालगंज में उसके उम्मीदवार मैदान में हैं।

यूपी की कौन सी सीट बनी हाई प्रोफाइल?

  • सुलतानपुर
  • इलाहाबाद
  • आजमगढ़
  • जौनपुर
  • भदोही
  • डुमरियागंज

किस सीट पर हो रहा जबरदस्त मुकाबला?

सुलतानपुर

सुलतानपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार मेनका गांधी का समाजवादी पार्टी (सपा) के भीम निषाद और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उदयराज वर्मा से कड़ा मुकाबला है।

इलाहाबाद

इलाहाबाद सीट पर पूर्व राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी के बेटे पर भाजपा ने भरोसा जताया है। नीरज त्रिपाठी का मुकाबला कांग्रेस के उज्जवल रमण सिंह से है। वहीं बसपा ने रमेश कुमार पटेल को यहां अपना उम्मीदवार बनाया है।

आजमगढ़

वर्ष 2019 में सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा जीती गई आजमगढ़ सीट पर निवर्तमान भाजपा सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ का मुकाबला सपा के धर्मेंद्र यादव से है। धर्मेंद्र यादव वर्ष 2022 के लोकसभा उपचुनाव में निरहुआ से हार गए थे।

जौनपुर

जौनपुर सीट पर रोचक मुकाबला है जहां महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री एवं भाजपा उम्मीदवार कृपाशंकर सिंह का मुकाबला सपा उम्मीदवार बाबू सिंह कुशवाहा और बसपा के निवर्तमान सांसद श्याम सिंह यादव से है।

भदोही

भदोही में तृणमूल कांग्रेस के ललितेश पति त्रिपाठी मैदान में हैं। सपा ने अपने कोटे से एक सीट टीएमसी को दी है। वहीं भाजपा ने यहां बिनोद कुमार बिंद और बसपा ने इस सीट से हरिशंकर को अपना उम्मीदवार बनाया है।

डुमरियागंज

लगातार तीन बार से डुमरियागंज के सांसद चुने जा रहे जगदंबिका पाल का मुकाबला इस बार समाजवादी पार्टी के भीष्म शंकर तिवारी से होने जा रहा है। इसके अलावा बसपा ने इस सीट से मोहम्मद नदीम को अपना उम्मीदवार बनाया है।

बता दें, प्रचार समाप्त होने के बाद राजनीतिक दलों के सभी बाहरी कार्यकर्ताओं को उन जिलों में रुकने की अनुमति नहीं दी जाती है, जहां मतदान होना होता है। सात चरणों में हो रहे लोकसभा चुनाव 2024 के अंतिम चरण के लिए 1 जून को वोटिंग होनी है। जिसके बाद 4 जून को नतीजे आएंगे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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