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Jharkhand Chunav Parinam 2024, Key Candidates: झारखंड में किसका बजा डंका, किसकी लगी लंका? दिग्गजों में कौन आगे-कौन पीछे; देखें हर Updates

Jharkhand Chunav Parinam 2024, Hemant Soren, Champai Soren, Sita Soren, Kalpana Soren, Sudesh Mahato, Babu Lal Marandi, Saryu Rai, Mahua Maji Assembly Election 2024 Results: झारखंड में किसकी सरकार बनेगी और किसकी उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा? इसका फैसला अब से कुछ ही देर में हो जाएगा। विधानसभा चुनाव 2024 के लिए मतगणना में आज सारे सवाल के जवाब मिल जाएंगे। तस्वीर पूरी साफ हो जाएगी कि हेमंत सोरेन की वापसी होती है, या फिर भाजपा के 5 साल का सूखा खत्म होता है।

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झारखंड में इन दिग्गजों का क्या होगा?

Jharkhand Chunav Parinam 2024, Hemant Soren, Champai Soren, Sita Soren, Kalpana Soren, Sudesh Mahato, Babu Lal Marandi, Saryu Rai, Mahua Maji Assembly Election 2024 Results Updates: झारखंड का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा, हेमंत सोरेन की कुर्सी बच जाएगी या भाजपा की सरकार बनेगी? ऐसे तमाम सवाल हैं, जिनके सवाल अब से कुछ देर में मिल जाएंगे। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ने ही झारखंड में अगली सरकार बनाने को लेकर विश्वास जताया। आपको इस रिपोर्ट में झारखंड विधानसभा चुनाव में उन बड़े नेताओं के चुनावी नतीजों से लगातार अपडेट कराते हैं, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। इसमें हेमंत सोरेन, चंपई सोरेन, बाबूलाल मरांडी, कल्पना सोरेन, सीता सोरेन जैसे दिग्गजों के नाम शुमार हैं। जिनकी सियासी किस्मत का फैसला होना है।

झारखंड के इन दिग्गजों का क्या होगा?

उम्मीदवार का नामविधानसभा सीटपार्टीचुनावी परिणाम
हेमंत सोरेनबरहेटJMMजीत
चंपई सोरेनसरायकेलाBJPजीत
सीता मुर्मूजामताड़ाBJPहार
कल्पना सोरेनगांडेयJMMजीत
सुदेश महतोसिल्लीAJSUहार
बाबू लाल मरांडीधनवारBJPजीत
सरयू रायजमशेदपुर पश्चिमJD(U)जीत
महुआ माजीरांचीJMMहार

हेमंत सोरेन का किससे मुकाबला?

साहिबगंज जिले के बरहेट से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बतौर झामुमो प्रत्याशी तीसरी बार मैदान में हैं। उनका मुकाबला आजसू छोड़कर भाजपा में आए प्रत्याशी गमालियल हेम्ब्रम से है। गमालियल को बतौर आजसू प्रत्याशी 2019 के विधानसभा चुनाव में केवल 2,573 वोट मिले थे। 2019 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने साइमन मालतो को उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें 48 हजार से अधिक वोट मिले थे। इस बार भाजपा ने साइमन मालतो का टिकट काट दिया, तो वे नाराज होकर झामुमो में शामिल हो गए और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रचार अभियान की कमान संभाल रहे हैं।

चंपई सोरेन का किससे मुकाबला?

झारखंड की सरायकेला विधानसभा सीट इस वक्त एक हॉट सीट बन चुकी है। पूर्व सीएम चंपई सोरेन को भाजपा ने मैदान में उतरा है, वो पहले झामुमो में थे। चुनाव से कुछ ही समय पहले वह भाजपा में शामिल हुए थे। चंपई पांच महीने तक झारखंड के सीएम रहे। सरायकेला सीट से वो छह बार विधायक बन चुके हैं। सरायकेला विधानसभा सीट पर झामुमो के गणेश महाली और भाजपा के चंपई सोरेन की सीधी टक्कर है।

सीता मुर्मू का किससे मुकाबला?

जामताड़ा में पूर्व सांसद और विधायक फुरकान अंसारी के पुत्र इरफान अंसारी कांग्रेस के प्रत्याशी हैं, जिन्हें शिबू सोरेन की बड़ी बहू भाजपा की सीता सोरेन कड़ी टक्कर दे रही हैं। जामताड़ा की गिनती भी राज्य की हॉट सीटों में हो रही है, जहां से हमेशा अपने बयानों की वजह से विवादों में रहने वाले कांग्रेस उम्मीदवार और हेमंत सरकार के मंत्री इरफान अंसारी हैट्रिक की उम्मीद के साथ मैदान में हैं। इन्हें सोरेन परिवार की बहू और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन उन्‍हें कड़ी टक्कर दे रही हैं।

कल्पना सोरेन का किससे मुकाबला?

गांडेय सीट पर सीएम हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन मुर्मू झामुमो की प्रत्याशी हैं, जिन्हें भाजपा की प्रत्याशी मुनिया देवी से टक्कर मिल रही है। गिरिडीह जिले की गांडेय भी झारखंड चुनाव में हॉट सीट है, जहां से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और झामुमो की स्टार प्रचारक कल्पना सोरेन मुर्मू मैदान में हैं। भाजपा ने उनके खिलाफ गिरिडीह जिला परिषद की अध्यक्ष मुनिया देवी को मैदान में उतारा है। मुस्लिम और आदिवासी बहुल मतदाताओं वाली इस सीट पर सिर्फ एक बार 2014 में भाजपा प्रत्याशी जयप्रकाश वर्मा को जीत हासिल हुई थी।

सुदेश महतो का किससे मुकाबला?

आजसू प्रमुख सुदेश महतो की उम्मीदवारी के कारण रांची जिले के सिल्ली सीट की गिनती भी राज्य की हॉट सीटों में होती है। 2014 को छोड़कर 2000 से 2019 तक सुदेश महतो का इस सीट पर कब्ज़ा रहा है। 2014 में झामुमो उम्मीदवार के तौर पर अमित महतो ने उनसे यह सीट छीनी थी। झामुमो ने एक बार फिर अमित महतो को प्रत्याशी बनाया है। सुदेश और अमित के बीच आमने-सामने के इस मुकाबले को जेएलकेएम (झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा) के देवेंद्र महतो त्रिकोणीय बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

बाबू लाल मरांडी का किससे मुकाबला?

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी धनवार विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। उनका मुकाबला JMM के निजामुद्दीन अंसारी से है। बाबूलाल मरांडी ने 2019 में झारखंड विकास मोर्चा के सिंबल पर चुनाव लड़ा था और बीजेपी के लक्ष्मण प्रसाद सिंह को 17550 मतों से हराया था। इस बार वह बीजेपी के सिंबल पर लड़ रहे हैं। गिरिडीह जिले की धनवार सीट पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी मैदान में हैं। इस सीट पर इंडिया गठबंधन की एकता दरकी हैं और यहां से झामुमो-भाकपा माले गठबंधन के दोनों दलों ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं। भाकपा माले ने राजकुमार यादव और झामुमो ने निजामुद्दीन अंसारी को उम्मीदवार बनाया। भाजपा के वोटों में सेंधमारी कर रहे निर्दलीय प्रत्याशी निरंजन राय ने गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली और प्रचार अभियान के आखिरी दौर में वे बाबूलाल मरांडी के साथ घूम-घूमकर उनके लिए वोट मांगते दिखे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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