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ए​क Film के चलते हिल गई थी इंदिरा गांधी की सरकार, आखिर क्या थी वजह!

Siyasi Kisse: इंदिरा गांधी सरकार के शासनकाल में एक फिल्म आई थी किस्सा कुर्सी का, इस फिल्म ने तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार को हिलाकर रख दिया था ऐसा कहा जाता है।

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इंदिरा गांधी सरकार के शासनकाल में एक फिल्म आई थी 'किस्सा कुर्सी का'

KEY HIGHLIGHTS

  1. 'किस्सा कुर्सी का...फिल्म में संजय गांधी और उनके करीबियों को निशाना बनाया गया था
  2. संजय गांधी पर आरोप था कि उनके कहने पर 'किस्सा कुर्सी का' फिल्म के प्रिंट जला दिए गए थे
  3. शाह आयोग ने संजय को सूचना और प्रसारण मंत्री वीसी शुक्ला के साथ दोषी पाया

kisse chunav ke: लोकसभा चुनाव 2024 की गहमा-गहमी के बीच आज बात इंदिरा गांधी शासनकाल के एक किस्से की जिसमें जानकार बताते हैं कि उस वक्त एक बॉलीवुड की एक फिल्म जिससे इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी को दिक्कत हो गई थी, वहीं इंदिरा गांधी भी इसको लेकर परेशान थीं, फिल्म का नाम था 'किस्सा कुर्सी का...

बताते हैं कि इस फिल्म में संजय गांधी और उनके करीबियों को निशाना बनाया गया था, फिल्म में उस वक्त के नामचीन कलाकार जैसे-शबाना आजमी, उत्पल दत्त थे, उस फिल्म में राज बब्बर मुख्य भूमिका में थे, फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे राजनेता बने कलाकार अजीबोगरीब फैसले लेने लगते हैं, यह फिल्म जनता पार्टी के सांसद अमृत नाहटा ने बनाई थी, जो पहले कांग्रेस में थे।

दरअसल, संजय गांधी पर आरोप था कि उनके कहने पर 'किस्सा कुर्सी का' फिल्म के प्रिंट जला दिए गए थे बताते हैं कि फिल्म की नेगेटिव जब्त कर ली गई थी और बाद में उसे कथित तौर पर जला दिया गया और फिल्म पर बैन लगा दिया गया था।

फिल्म इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी की राजनीति पर एक व्यंग्य थी

'किस्सा कुर्सी का' भारतीय हिंदी भाषा की राजनीतिक व्यंग्य फिल्म थी, जो अमृत नाहटा द्वारा निर्देशित है जो भारतीय संसद के सदस्य थे, यह फिल्म इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी की राजनीति पर एक व्यंग्य थी और आपातकाल के दौरान भारत सरकार द्वारा इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और सभी प्रिंट जब्त कर लिए गए थे।

kissa kursi ka

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फिल्म सिस्टम और राजनेताओं के स्वार्थ पर एक टिप्पणी

फिल्म का कथानक एक भ्रष्ट और दुष्ट राजनेता गंगाराम या गंगू के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसका किरदार मनोहर सिंह ने निभाया है, जो जनता को लुभाने की कोशिश कर रहा है , जिसे मूक और असहाय दिखने वाली ( शबाना आज़मी ) के रूप में दर्शाया गया है। फिल्म सिस्टम और राजनेताओं के स्वार्थ पर एक विनोदी टिप्पणी है और इसे कार्टूनिस्ट कॉलम का मोशन पिक्चर संस्करण माना जाता है जो राजनीति पर सबसे क्रूर तंज है।

51 आपत्तियां उठाते हुए कारण बताओ नोटिस भेजा गया था

फिल्म को अप्रैल 1975 में प्रमाणन के लिए सेंसर बोर्ड को प्रस्तुत किया गया था। बोर्ड ने सात सदस्यीय पुनरीक्षण समिति को भेजा, जिसने इसे आगे केंद्र सरकार को भेजा। इसके बाद, सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा निर्माता को 51 आपत्तियां उठाते हुए कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। 11 जुलाई 1975 को प्रस्तुत अपने उत्तर में, नाहटा ने कहा कि पात्र 'काल्पनिक थे और किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्तियों का उल्लेख नहीं करते थे', तब तक आपातकाल (Emergency) की घोषणा हो चुकी थी।

सेंसर बोर्ड कार्यालय से फिल्म के सभी प्रिंट और मास्टर-प्रिंट उठा लिए गए

इसके बाद, सेंसर बोर्ड कार्यालय से फिल्म के सभी प्रिंट और मास्टर-प्रिंट उठा लिए गए, बाद में गुड़गांव में मारुति फैक्ट्री में लाए गए , जहां उन्हें जला दिया गया। भारतीय आपातकाल में हुई ज्यादतियों की जांच के लिए 1977 में भारत सरकार द्वारा स्थापित शाह आयोग ने संजय गांधी को उस समय के सूचना और प्रसारण मंत्री वीसी शुक्ला के साथ नकारात्मकता को जलाने का दोषी पाया।

संजय गांधी को जमानत नहीं मिली

कानूनी मामला 11 महीने तक चला और अदालत ने 27 फरवरी 1979 को अपना फैसला सुनाया। संजय गांधी और शुक्ला दोनों को एक महीने और दो साल की जेल की सजा सुनाई गई। संजय गांधी को जमानत नहीं मिली, बाद में फैसला पलट दिया गया था।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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