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अमेठी में भी न हो जाए कोई गेम! स्मृति ईरानी के खिलाफ कांग्रेस के 'किशोरी' बोले- 'मैं उनकी नौकरी नहीं करता'

Amethi Lok Sabha Election: अमेठी से स्मृति ईरानी के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रहे किशोरी लाल शर्मा ने कहा, मैं एक पॉलिटीशियन हूं। मैं कांग्रेस की नौकरी नहीं करता हूं और न ही उनसे सैलरी लेता हूं। मैं शुद्ध रूप से एक राजनीतिज्ञ हूं।

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अमेठी से कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा

Photo : ANI

Amethi Lok Sabha Election: उत्तर प्रदेश की हॉटसीटों में शुमार अमेठी लोकसभा क्षेत्र की जंग काफी रोमांचक हो गई है। 2019 में स्मृति ईरानी से हार के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी इस पारंपरिक सीट को पूरी तरह छोड़ दिया है। कांग्रेस ने इस सीट से गांधी परिवार के बेहद करीबी किशोरी लाल शर्मा को टिकट दिया है। यह पहली बार है जब कांग्रेस के टिकट पर कोई गैर गांधी अमेठी से चुनावी मैदान में है। भले ही गांधी परिवार यहां प्रत्यक्ष तौर पर चुनाव न लड़ रहा हो, इसके बावजूद अमेठी की जंग पूरी कांग्रेस पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है।

इस बीच अमेठी से कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ रहे किशोरी लाल शर्मा ने बड़ा बयान दिया है। स्मृति ईरानी से मुकाबले को लेकर उन्होंने कहा, यह पार्टी नेतृत्व का फैसला था क्योंकि पहले यह तय नहीं था कि यहां से कौन चुनाव लड़ेगा, उन्होंने कहा मुख्य बात यह है कि अब मैं स्मृति ईरानी को हराऊंगा, उन्होंने कहा, यह एक बड़ा बयान है जो मैं आज दे रहा हूं।

मैं कांग्रेस की नौकरी नहीं करता

किशोरी लाल शर्मा ने कहा, मैं एक पॉलिटीशियन हूं। मैं कांग्रेस की नौकरी नहीं करता हूं और न ही उनसे सैलरी लेता हूं। मैं शुद्ध रूप से एक राजनीतिज्ञ हूं। उन्होंने कहा, आज भले ही मेरी हैसियत उनके (स्मृति ईरानी) जैसी नहीं है, लेकिन इससे पहले मेरी हैसियत कहीं बड़ी थी। मैं 1983 में युवा कांग्रेस के माध्यम से यहां आया था और एमैं एक शुद्ध राजनीतिज्ञ हूं।

गांधी परिवार के करीबी हैं केएल शर्मा

किशोरी लाल शर्मा को गांधी परिवार का करीबी माना जाता है। मूल रूप से लुधियाना के रहने वाले किशोरी लाल शर्मा राजीव गांधी के साथ अमेठी आए थे और इसके बाद यहीं के होकर रह गए। वह लंबे समय से रायबरेली और अमेठी में पार्टी का काम देख रहे हैं और सोनिया गांधी के सांसद बनने के बाद वह सांसद प्रतिनिधि के रूप में रायबरेली में काम करते रहे। लंबे सस्पेंस के बाद कांग्रेस ने अमेठी से केएल शर्मा को लोकसभा चुनाव में मैदान में उतारा है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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