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Hot Seat: कितनी दिलचस्प है डुमरियागंज की चुनावी लड़ाई? मैदान में कुल 6 उम्मीदवार; जानें इस सीट का इतिहास

Domariyaganj Election: उत्तर प्रदेश की डुमरियागंज लोकसभा सीट पर इस बार की चुनावी लड़ाई बेहद दिलचस्प होने वाली है। पिछले 15 सालों से जगदंबिका पाल इस सीट से सांसद चुने जा रहे हैं, 2009 में वो कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। 2014 में भाजपा के साथ आ गए। आपको इस सीट के समीकरण और इतिहास से रूबरू कराते हैं।

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समझें डुमरियागंज सीट का समीकरण।

Photo : Times Now Digital

Lok Sabha Chunav: 15 साल पहले कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए जगदंबिका पाल एक बार फिर यूपी की डुमरियागंज से मैदान में हैं। 2014 में उन्होंने पंजा से हाथ छुड़ाकर कमल का दामन थाम लिया था। भाजपा के टिकट पर दो लगातार दो बार और इस सीट से लगातार 3 बार सांसद चुने जा चुके हैं। वो इस बार इस कोशिश में होंगे कि जीत का सिलसिला यूं ही जारी रखा जाए। हालांकि उनकी राह आसान नहीं है, इस बार इस सीट से छह उम्मीदवार मैदान में हैं। आपको इस सीट का समीकरण और चुनावी इतिहास समझाते हैं।

क्या कहता है इस बार का समीकरण?

लगातार तीन बार से डुमरियागंज के सांसद चुने जा रहे जगदंबिका पाल का मुकाबला इस बार समाजवादी पार्टी के भीष्म शंकर तिवारी से होने जा रहा है। इसके अलावा बसपा ने इस सीट से मोहम्मद नदीम को अपना उम्मीदवार बनाया है।

डुमरियागंज से मैदान में कितने उम्मीदवार?

क्रमांकनामपार्टी
1जगदंबिका पालभाजपा
2भीष्म शंकर तिवारीसमाजवादी पार्टी
3मो. नदीमबहुजन समाज पार्टी
4अमर सिंह चौधरीएएसपी (केआर)
5नौशाद आलमपीस पार्टी
6किरण देवीनिर्दलीय

लोकसभा चुनाव 2019 का परिणाम

जब पिछले चुनाव में सपा और बसपा ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था तो भी जगदंबिका पाल ने आसानी से जीत हासिल कर ली थी। ऐसे में इस बार भी उनकी मुश्किलों में ज्यादा इजाफा होता नजर नहीं आ रहा है।

पार्टीउम्मीदवारवोट
भाजपाजगदंबिका पाल492,253
बसपाआफताब आलम3,86,932
कांग्रेससिकंदर अली जलालुद्दीन60,549

क्या कहता है इस सीट का चुनावी इतिहास

डुमरियागंज लोकसभा सीट पर सात बार कांग्रेस पार्टी का कब्जा रहा है। जबकि एक बार भारतीय जनसंघ, एक बार जनता दल और एक बार ही जनता पार्टी ने चुनाव जीता है। यहां पांच बार भाजपा उम्मीदवार को जीत हासिल हुई है। जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को एक बार जीत नसीब हुई है। इस क्षेत्र के पहले सांसद केशव देव मालवीय चुने गए थे। यदि जगदंबिका इस बार चुनाव जीतते हैं को सबसे अधिक बार सांसद चुने जाने का रिकॉर्ड बना लेंगे। उनके अलावा भाजपा के ही रामपाल सिंह यहां से तीन बार सांसद चुने जा चुके हैं।

कब कौन बना डुमरियागंज का सांसद?

वर्षनामपार्टी
1952केशव देव मालवीयभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1957राम शंकर लालभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1962कृपा शंकरभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1967नारायण स्वरूप शर्माभारतीय जनसंघ
1971केशव देव मालवीयभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1977माधव प्रसाद त्रिपाठीजनता पार्टी
1980काजी जलील अब्बासीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1984काजी जलील अब्बासीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1989बृजभूषण तिवारीजनता दल
1991रामपाल सिंहभारतीय जनता पार्टी
1996बृजभूषण तिवारीसमाजवादी पार्टी
1998रामपाल सिंहभारतीय जनता पार्टी
1999रामपाल सिंहभारतीय जनता पार्टी
2004मोहम्मद मुकीमबहुजन समाज पार्टी
2009जगदंबिका पालभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2014जगदंबिका पालभारतीय जनता पार्टी
2019जगदंबिका पालभारतीय जनता पार्टी
उत्तर प्रदेश की डुमरियागंज सीट पर छठे चरण में 25 मई को मतदान होने हैं। देखना होगा कि क्या जगदंबिका पाल इस सीट से सबसे अधिक बार सांसद चुने जाने का रिकॉर्ड अपने नाम कायम कर पाते हैं या नहीं। देशभर में 7 चरणों में हो रहे लोकसभा के लिए अंतिम चरण की वोटिंग 1 जून को होगी, जिसके बाद 4 जून को चुनावी नतीजे सामने आएंगे।
Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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