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Exit Poll: कंगना रनौत का क्या होगा? हिमाचल की मंडी सीट के नतीजे कर सकते हैं हैरान; जानें एग्जिट पोल में किसका दिखा जलवा

Himachal Pradesh Exit Poll: मंडी लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी की कंगना रनौत और कांग्रेस के विक्रमादित्य के बीच मुकाबला हुआ। एग्जिट पोल के नतीजों में ये अनुमान लगाया गया है कि मंडी सीट से कंगना रनौत को हार मिल सकती है। यहां विक्रमादित्य सिंह की जीत हो सकती है। आपको समीकरण समझना चाहिए।

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हिमाचल में किसका दबदबा?

Photo : Times Now Digital

What will happen to Kangana Ranaut: लोकसभा चुनाव 2024 के एग्जिट पोल जारी हो चुके हैं। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश की सभी 4 लोकसभा सीटों की स्थिति भी लगभग साफ हो गई है। एग्जिट पोल के अनुसार इस राज्य की 4 सीटों में से भाजपा 3 से 4 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। इसके अलावा यदि कांग्रेस की बात की जाए तो यहां विपक्षी गठबंधन INDIA में शामिल कांग्रेस के खाते में 0 से 1 सीटें आने की संभावना है।

चुनाव हार सकती हैं कंगना रनौत

मंडी लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी की कंगना रनौत और कांग्रेस के विक्रमादित्य के बीच कड़ा मुकाबला है। टाइम्स नाउ नवभारत ईटीजी (Timesnow Navbharat ETG) सर्वे में ये अनुमान लगाया गया है कि मंडी सीट से कंगना रनौत को हार मिल सकती है। यहां विक्रमादित्य सिंह की जीत हो सकती है।

क्या कहता है मंडी लोकसभा सीट का इतिहास?

मंडी लोकसभा सीट पर 1952 के बाद से दो उपचुनावों सहित कुल 19 चुनाव हुए हैं, जिनमें से 13 चुनावों में पूर्व रियासतों के वंशजों को चुना है। शिमला (ग्रामीण) विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे विक्रमादित्य सिंह मंडी संसदीय क्षेत्र के लिए नए नहीं हैं, क्योंकि उनके पिता और मां दोनों ने तीन-तीन बार यह सीट जीती है। मंडी लोकसभा सीट पर 2021 के उपचुनाव में सिंह ने अपनी मां के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार किया था। मंडी में भाजपा को अब तक महज 5 बार जीत नसीब हुई है, जबकि 13 बार कांग्रेस के सांसद चुनकर संसद पहुंचे। इस सीट पर एक बार 1977 में जनता पार्टी ने जीत हासिल की थी। कांग्रेस के गोपी राम इस सीट से पहले सांसद चुने गए थे।

कंगना रनौत vs विक्रमादित्य सिंह का मुकाबला

हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से कांग्रेस ने राज्य सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह को उम्मीदवार बनाया, जिसके साथ ही इस सीट पर विक्रमादित्य और भाजपा उम्मीदवार एवं अभिनेत्री कंगना रनौत के बीच एक बेहद दिलचस्प चुनावी मुकाबला हुआ, जिसके नतीजे 4 जून को आएंगे। हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मंत्री विक्रमादित्य सिंह छह बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह एवं कांग्रेस की राज्य इकाई की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के बेटे हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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