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आर्टिकल 370 हटने के बाद कश्मीर में पहला चुनाव: टूटा वोटिंग का रिकॉर्ड, 1996 के बाद सबसे ज्यादा मतदान; देखिए आंकड़े

Srinagar Lok Sabha Polls 2024: 1996 में जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर लोकसभा सीट पर लगभग 41 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसके बाद मतदान प्रतिशत के आंकड़े लगातार गिरते चले गए। आर्टिकल 370 हटने के बाद यह पहला चुनाव है, जो बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हुआ और यहां 1996 के बाद सबसे ज्यादा वोटिंग भी हुई।

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श्रीनगर में 1996 के बाद सबसे ज्यादा मतदान

Photo : Twitter

Srinagar Lok Sabha Polls 2024: जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद कश्मीर में पहली बार चुनाव हो रहे हैं। लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में कश्मीर की श्रीनगर लोकसभा सीट पर सोमवार को वोटिंग हुई। 1996 के बाद यह पहली बार है, जब बिना किसी अप्रिय घटना के चुनाव संपन्न हुए और सबसे ज्यादा वोटिंग भी हुई। चुनाव आयोग की ओर से दिए गए अब तक के आंकड़े के मुताबिक, श्रीनगर लोकसभा सीट पर 38 फीसदी मतदान हुए, जो बीते 28 सालों में सबसे ज्यादा है। इससे पहले 1996 में जम्मू-कश्मीर में इस सीट पर लगभग 41 प्रतिशत मतदान हुआ था।

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के बाद श्रीनगर निर्वाचन क्षेत्र में पहला आम चुनाव हुआ। निर्वाचन आयोग के अनुसार, वहां रात 11 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार 38 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्साहजनक मतदान के लिए श्रीनगर के मतदाताओं की सराहना की। उन्होंने कहा, अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने से लोगों की क्षमता और आकांक्षाओं को पूर्ण अभिव्यक्ति मिल सकी है। यह जमीनी स्तर पर हो रहा है और यह जम्मू-कश्मीर के लोगों, विशेष रूप से युवाओं के लिए बहुत अच्छी बात है।

1996 के बाद धीरे-धीरे गिरता गया मतदान प्रतिशत

निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक मतदान 1996 में हुआ था। उस समय लगभग 41 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था। बयान में कहा गया है कि 2019 में 14.43 प्रतिशत वोट पड़े थे, जबकि पिछले संसदीय चुनावों में यह आंकड़ा 25.86 प्रतिशत (2014), 25.55 प्रतिशत (2009), 18.57 प्रतिशत (2004), 11.93 प्रतिशत (1999) और 30.06 प्रतिशत (1998) था।

कश्मीरी पंडित भी पहुंचे मतदान करने

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और राजनीतिक दलों ने श्रीनगर निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को इस ऐतिहासिक मतदान के लिए बधाई दी। निर्वाचन क्षेत्र के कश्मीरी पंडित जम्मू में विशेष मतदान केंद्रों पर पहुंचे और उन्होंने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मोर्चों पर अपने समुदाय के पुनर्वास के लिए मतदान किया। श्रीनगर निर्वाचन क्षेत्र के तहत श्रीनगर, गांदेरबल, पुलवामा जिले, बडगाम व शोपियां जिलों में 2,135 मतदान केंद्रों पर सुबह सात बजे मतदान आरंभ हुआ।

(एजेंसी इनपुट- भाषा)

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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