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Delhi MCD Elections : एमसीडी चुनाव में 35 फीसदी उम्मीदवार ग्रेजुएट तो 60 अशिक्षित, जानिए क्या कहती है ADR की रिपोर्ट

  • Authored by: संजीव कुमार दुबे
  • Updated Nov 28, 2022, 12:48 PM IST

Delhi MCD Elections 2022: उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण करने के बाद एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने कहा है कि नगर निगम का चुनाव लड़ रहे 35 प्रतिशत से ज्यादा उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके पास कम से कम स्नातक की डिग्री है जबकि चार प्रतिशत उम्मीदवार 'अशिक्षित' हैं।

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दिल्ली एमसीडी चुनाव में इस बार भाजपा को टक्कर दे रही AAP

Photo : PTI

Delhi MCD Polls 2022 : दिल्ली नगर निगम के लिए चुनावी शोर तेज चुका है। इस बार भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच मुकाबला देखा जा रहा है। उम्मीदवार वादों और दावों के जरिए मतदाताओं को अपनी तरफ रिझा रहे हैं। चुनावी अखाड़े में इस बार कुल 1,349 प्रत्याशी हैं जिनकी राजनीतिक किस्मत का फैसला मतदाता करेंगे। दिल्ली नगर निगम चुनाव 2022 के लिए 4 दिसंबर को मतदान होगा और 7 दिसंबर को इसका परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। एमसीडी के नए परिसीमन के मुताबिक, इस बार 250 सीटों पर वोटिंग होगी। नगर निगम के एकीकरण के बाद दिल्ली में 272 की जगह अब 250 वार्ड हो गए हैं।

1336 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण

उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण करने के बाद एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने कहा है कि नगर निगम का चुनाव लड़ रहे 35 प्रतिशत से ज्यादा उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके पास कम से कम स्नातक की डिग्री है जबकि चार प्रतिशत उम्मीदवार 'अशिक्षित' हैं। देश के चुनावों एवं उम्मीदवारों का आंकलन करने वाली संस्था एडीआर एवं दिल्ली इलेक्शन वॉच ने 1336 उम्मीदवारों के हलफनामों के विश्लेषण में कई अहम बातें पाई हैं। राज्य चुनाव आयोग की वेबसाइट पर 13 उम्मीदवारों के हलफनामे या तो अच्छी तरह से स्कैन नहीं थे या वे अपूर्ण थे। इसलिए उनका विश्लेषण नहीं हो सका।

752 प्रत्याशियों की शैक्षिक योग्यता 5वीं से 12वीं के बीच

रिपोर्ट के मुताबिक करीब 752 उम्मीदवार (56 प्रतिशत) प्रत्याशी ने घोषणा की है कि उनकी शैक्षिक योग्यता 5वीं से 12वीं के बीच है। जबकि 487 उम्मीदवार (36 फीसदी) का कहना है कि उनकी शैक्षिक योग्यता स्नातक या उससे अधिक है। 12 उम्मीदवारों के पास डिप्लोमा की डिग्री है। वहीं, 22 प्रत्याशियों ने घोषणा की है कि वे मात्र साक्षर हैं। 60 उम्मीदवारों ने कहा है कि वे अशिक्षित हैं। रिपोर्ट के अनुसार तीन उम्मीदवार ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी शैक्षिक योग्यता के बारे में जानकारी नहीं दी है।

55 प्रतिशत उम्मीदवारों की उम्र 41 से 60 साल के बीच

रिपोर्ट के अनुसार 55 प्रतिशत उम्मीदवारों की उम्र 41 से 60 साल के बीच है। कम से कम पांच प्रतिशत उम्मीदवार ऐसे भी हैं जिनकी उम्र 61 से 80 साल के बीच है। 510 उम्मीदवारों की उम्र 21 से 40 साल के बीच है। जबकि 741 प्रत्याशियों का कहना है कि उनकी उम्र 41 से 60 साल के बीच है। 73 उम्मीदवारों ने अपनी उम्र 61 से 80 साल के बीच बताई है। वहीं 12 प्रत्याशी ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी उम्र के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

भाजपा ने घोषणापत्र में किए कई वादे

एमसीडी चुनाव में इस बार त्रिकोणीय लड़ाई है। भाजपा, कांग्रेस और आप तीनों ही पार्टियां एक-दूसरे पर हमला कर रही हैं। शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी ने अपना घोषणापत्र जारी किया। भगवा पार्टी ने अपने घोषणापत्र में कई वादे किए हैं। भाजपा का कहना है कि वह एमसीडी की सभी सेवाओं के लिए एक एप लाएगी। हरी एवं स्वच्छ दिल्ली के लिए वह कचरे से ऊर्जा बनाएगी। पार्टी ने कहा है कि झुग्गियों में रहने वाले लोगों को वह फ्लैट देगी। राजधानी में 17,000 फ्लैट्स अलॉटमेंट के लिए तैयार हैं। इसके अलावा भाजपा ने कई सारे वादे किए हैं।

संजीव कुमार दुबे
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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