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पटपड़गंज की जनता ने अवध ओझा को नहीं बनाया 'राजा', और 32 साल बाद बदल गया इतिहास

Ravi Negi vs Awadh Ojha: दिल्ली के चुनावी इतिहास में 32 साल के बाद पटपड़गंज सीट पर भारतीय जनता पार्टी को जीत नसीब हुई है। अपनी बड़ी-बड़ी बातों से सोशल मीडिया पर छाए रहने वाले अवध ओझा की हार जनता ने सुनिश्चित कर दी है। इस विधानसभा क्षेत्र की जनता ने ओझा सर को 'राजा' नहीं बनाया। आपको इस सीट का इतिहास समझाते हैं।

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रविंद्र नेगी ने अवध ओझा को दी पटखनी।

Patparganj Election Result: दिल्ली के इतिहास में दूसरी बार पटपड़गंज सीट पर जीत का डंका बजाया है। हार के डर से मनीष सिसोदिया ने भले ही अपनी सीट बदल ली, लेकिन उनको जंगपुरा से भी हार मिली और पटपड़गंज से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अवध ओझा को भी करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। दिल्ली चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी ने 48 सीटों पर कब्जा जमाते हुए प्रचंड जीत हासिल की। इसमें एक दिलचस्प लड़ाई पटपड़गंज सीट पर भी देखने को मिली। पटपड़गंज विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी रवि नेगी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की है।

1993 के बाद पहली बार पटपड़गंज जीती भाजपा

पटपड़गंज विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी रवि नेगी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। उन्होंने शिक्षक से राजनीति क्षेत्र में आए और पहली बार चुनाव लड़ रहे अवध ओझा को बड़े अंतर से हराया। 2013 से अब तक इस क्षेत्र के मनीष सिसोदिया विधायक रहे हैं।

किसने कब जीता पटपड़गंज का चुनाव?

वर्षनामपार्टी
1993ज्ञान चंदभारतीय जनता पार्टी
1998अमरीश सिंह गौतमभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2003अमरीश सिंह गौतमभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2008अनिल चौधरीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2013मनीष सिसोदियाआम आदमी पार्टी
2015मनीष सिसोदियाआम आदमी पार्टी
2020मनीष सिसोदियाआम आदमी पार्टी
2025रविंदर सिंह नेगीभारतीय जनता पार्टी

रवि नेगी ने कहा- अब अधूरे काम पूरे होंगे

पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र से रवि नेगी ने कहा, "ये जीत पीएम मोदी की है। पिछली बार आम आदमी पार्टी की सुनामी चल रही थी। उस सुनामी में मेरे जैसे मध्यम गरीब परिवार का आदमी मनीष सिसोदिया के सामने लड़ रहा था। उस सुनामी में भी हमने उनको छठी का दूध याद दिलाया था। लेकिन अब पटपड़गंज में हमने जीत दर्ज की है।"

उन्होंने कहा कि दिल्ली में 27 साल बाद भारतीय जनता पार्टी आई है। दिल्ली के जितने भी अधूरे काम हैं, वो अब पूरे होंगे। आप सरकार ने पिछले 12 सालों से दिल्ली के लोगों को जो गटर का पानी पिलाया है, उसे दूर करेंगे। सीवरेज की समस्या को ठीक करेंगे। झुग्गी-बस्तियों में जो नशा बिक रहा है, उस पर लगाम कसेंगे।"

हार के बाद क्या बोले अवध ओझा?

शिक्षा क्षेत्र से राजनीति में आए अवध ओझा दिल्ली के पटपड़गंज विधानसभा से पहली बार चुनाव लड़े, जहां पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हार के बाद उन्होंने कहा, "हार-जीत कुछ नहीं होती है। पटपड़गंज में मेरी दूसरे नंबर की पोजीशन रही। मैंने पहली बार राजनीतिक सफर शुरू किया, जिसमें मेरी दूसरे नंबर की पोजीशन है और मैं इस उपलब्धि से बहुत खुश हूं।"

भाजपा की जीत को लेकर उन्होंने कहा, "ये जनता के जनार्दन का निर्णय है। जनता को जो निर्णय लेना था, वो उन्होंने लिया। जनता को ऐसा लगता है कि फेरबदल होना चाहिए। लंबे समय बाद दूसरी पार्टी को जिम्मेदारी मिलनी चाहिए, इसलिए ऐसा हुआ।" अवध ओझा ने अपनी आगे की रणनीति बनाने की बात कही।

पटपड़गंज में भाजपा प्रत्याशी रवि नेगी को 74,060 वोट मिले। वहीं, आप उम्मीदवार अवध ओझा को 45,988 मत प्राप्त हुए। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कुमार 16,549 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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