Himachal Pradesh Bypolls Date: लोकसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। दरअसल, लोकसभा चुनाव के साथ-साथ चुनाव आयोग ने यहां उपचुनाव का भी ऐलान कर दिया है। हिमाचल प्रदेश में छह विधानसभा सीटों पर एक जून को उपचुनाव होंगे। इसी दिन सातवें चरण में 4 लोकसभा सीटों के लिए मतदान होना है।
ऐसे में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के सामने 4 लोकसभा सीटों के साथ-साथ छह विधानसभा सीट बचाने की भी चुनौती होगी। बता दें, पिछले महीने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले छह कांग्रेस विधायकों की अयोग्यता के कारण ये सीटें खाली हो गई हैं, जिन पर उपचुनाव होना था। आज लोकसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही साथ 11 राज्यों की 26 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा भी की गई।
इन सीटों पर होना है उपचुनाव
हिमाचल प्रदेश में लाहुल और स्पीति, धर्मशाला, सुजानपुर, बड़सर, गगरेट और कुटलेहड़ विधानसभा सीट पर उपचुनाव होंगे। ये चुनाव हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के लिए कड़ी चुनौती माने जा रहे हैं। दरअसल, राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस सरकार बहुमत की कगार पर पहुंच गई है। इस चुनाव में विधानसभा में पर्याप्त बहुमत के बाद भी कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी को हार का सामना करना पड़ा था।
विधानसभा चुनाव में जीती थीं 40 सीटें
बता दें, हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 40 सीटें जीती थीं। जबकि, भाजपा ने 25 सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि, ये समीकरण तब बदल गए जब राज्यसभा चुनाव में छह कांग्रेस के बागियों के अलावा तीन निर्दलीय विधायक भाजपा के साथ हो लिए। ऐसे में भाजपा के खेमें 34 विधायक हो गए और कांग्रेस के पास भी 34 ही विधायक बचे और सरकार पर संकट आ गया। हालांकि, बाद में व्हिप के उल्लंघन के आरोप में विधानसभा स्पीकर ने कांग्रेस छह बागी विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया, जिससे विधानसभा बहुमत का आंकड़ा नीचे आ गया और कांग्रेस की सरकार बच गई।
ये विधायक ठहराए गए थे अयोग्य
हिमाचल प्रदेश के अयोग्य ठहराए गए विधायकों में सुधीर शर्मा, इंदर दत्त लखनपाल, रवि ठाकुर, राजिंदर राणा, चैतन्य शर्मा और देविंदर कुमार भुट्टो शामिल थे। इन विधायकों ने विधानसभा स्पीकर के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस मामले में 18 मार्च को सुनवाई होनी है।
