डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर, जिन्हें बाबा साहेब अंबेडकर के नाम से भी जाना जाता है, एक महान समाज सुधारक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माता थे। उनका जीवन संघर्ष, शिक्षा और सामाजिक न्याय के लिए समर्पण का प्रतीक है। हर साल की तरह इस वर्ष भी 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती मनाई जा रही है। बाबा साहेब ने 1927 में महाड सत्याग्रह का नेतृत्व किया, जिसके तहत दलितों को सार्वजनिक जलाशय से पानी लेने का अधिकार दिलाया। इतना ही नहीं 1932 में पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर किए, जिसने दलितों के लिए आरक्षित सीटों की व्यवस्था सुनिश्चित की। आइए डालते हैं एक नजर डॉ. भीमराव अंबेडकर के कुछ अनमोल विचारों पर:
1. “मुझे वह धर्म पसंद है जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाता है।”
2. “मैं एक समुदाय की प्रगति को उस डिग्री से मापता हूं जो महिलाओं ने हासिल की है।”
3. “वे इतिहास नहीं बना सकते जो इतिहास को भूल जाते हैं।”
4. “शिक्षित बनो, संगठित रहो और उत्तेजित बनो।”
5. “धर्म मनुष्य के लिए है न कि मनुष्य धर्म के लिए।”
6. “मनुष्य नश्वर है, उसी तरह विचार भी नश्वर हैं। एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत होती है, जैसे कि एक पौधे को पानी की, नहीं तो दोनों मुरझाकर मर जाते हैं।”
7. “एक महान आदमी एक प्रतिष्ठित आदमी से इस तरह से अलग होता है कि वह समाज का नौकर बनने को तैयार रहता है।”
8. “समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा।”
9. “बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।”10. “मानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा।”
