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फिर फिसली नीतीश कुमार की जुबान, अब कर दी पीएम मोदी को 'मुख्यमंत्री' बनाने की अपील

Nitish Kumar: पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के दनियावां इलाके में भाजपा नेता व एनडीए प्रत्याशी रविशंकर प्रसाद के समर्थन में एन जनसभा का आयोजन किया गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंच पर भाषण दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने भाषण के बीच लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर 400 से अधिक सीटों के साथ मुख्यमंत्री बनाने की बात कही।

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बिहार सीएम नीतीश कुमार

Photo : BCCL

Nitish Kumar: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने चुनावी भाषणों में लगातार स्लिप ऑफ टंग के शिकार हो रहे हैं। आए दिन उनकी जुबान फिसल जा रही है। रविवार को एक बार फिर एक सभा में नीतीश कुमार की जुबान फिसल गई और उन्होंने पीएम मोदी को मुख्यमंत्री बनाने की कामना कर दी। ऐसा पहली बार नहीं है जब लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश कुमार की जुबान फिसली हो, इससे पहले वे एनडीए की देशभर में 4000 सीट आने का भी दावा कर चुके हैं, जिसको लेकर उनकी काफी किरकिरी हुई थी।

बता दें, रविवार को पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के दनियावां इलाके में भाजपा नेता व एनडीए प्रत्याशी रविशंकर प्रसाद के समर्थन में एन जनसभा का आयोजन किया गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंच पर भाषण दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने भाषण के बीच लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर 400 से अधिक सीटों के साथ मुख्यमंत्री बनाने की बात कही। सीएम नीतीश के ऐसा कहने पर एक बार लोग चौंक गए। वहां मौजूद दूसरे नेताओं ने सीएम को इस बारे में याद दिलाया, तो उन्होंने सुधार किया और कहा कि पीएम मोदी तो एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री बनेंगे ही।

400 नहीं 4000 सीट आने का कर चुके हैं दावा

गौरतलब है कि इससे पहले भी नीतीश कुमार की जुबान कई बार फिसल चुकी है। इसके पहले 19 मई को वैशाली में चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की प्रत्याशी वीणा देवी के समर्थन में भाषण देते हुए कहा था कि हम चाहते हैं बिहार की सभी 40 सीटों पर एनडीए को जीत हासिल हो और देश भर में हमारा गठबंधन चार हजार सीटों पर जीत हासिल करे। सात अप्रैल को नवादा लोकसभा क्षेत्र में एक जनसभा के दौरान भी नीतीश ने अपने भाषण में एनडीए के चार हजार से ज्यादा सांसदों के जीतने की बात कही थी। बार-बार जुबान फिसलने से सीएम नीतीश की खूब किरकिरी भी होती रही है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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