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Keoti Assembly Election 2025:केवटी में फिर सियासी संग्राम; शिक्षा और रोजगार बने चुनावी मुद्दे, जानें इस विधानसभा सीट का समीकरण

Keoti Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में मधुबनी लोकसभा क्षेत्र की केवटी सीट एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में है। ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण इस सीट पर मुकाबले हमेशा कांटे के रहे हैं। इस बार भी जातीय समीकरण, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दे यहां के चुनावी रुझान तय करेंगे।

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केवटी विधानसभा चुनाव 2025

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Keoti Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की हलचल के बीच मधुबनी लोकसभा क्षेत्र और दरभंगा जिले की केवटी विधानसभा सीट पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। यह सीट हमेशा से बिहार की राजनीति में विशेष महत्व रखती आई है। इसके चुनावी मुकाबले प्रायः कड़े और रोमांचक रहे हैं। केवटी विधानसभा क्षेत्र में केवटी प्रखंड की 26 पंचायतें और सिंहवाड़ा प्रखंड की 12 पंचायतें शामिल हैं। इस सीट पर पहले चरण में 6 नवंबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। यह क्षेत्र मुख्यतः ग्रामीण और अर्धशहरी है, जहां स्थानीय समस्याएं हर चुनाव में अहम भूमिका निभाती हैं। इस बार रोजगार और शिक्षा दो प्रमुख चुनावी मुद्दे बनने की संभावना है। मतदाता क्षेत्र में नए रोजगार अवसरों के सृजन और शैक्षणिक सुधार की अपेक्षा कर रहे हैं। इसके साथ ही, बंद पड़ी चीनी मिल को पुनः शुरू कराने का मुद्दा भी चुनावी चर्चा में है, क्योंकि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने की उम्मीद है। वर्तमान में बेरोजगारी और शिक्षा की कमी के कारण यहां से बड़ी संख्या में लोग पलायन कर रहे हैं। इसके अलावा, जनता सरकारी योजनाओं के निष्पादन और राजस्व स्रोतों में अधिक पारदर्शिता की मांग भी लगातार कर रही है।

1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार की जीत

केवटी विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ावों से गुजरा है। 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार दुर्गादास ने यहां जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1990 और 1995 के चुनावों में गुलाम सरवर ने क्रमशः जनता दल और बाद में राजद के प्रत्याशी के रूप में लगातार विजय प्राप्त कर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाई। साल 2000 में भी यह सीट राजद के पास रही, लेकिन 2005 का चुनाव इस क्षेत्र की राजनीति के लिए एक अहम मोड़ साबित हुआ, जब भाजपा के डॉ. अशोक कुमार यादव ने गुलाम सरवर को हराकर सत्ता परिवर्तन कर दिया। इसके बाद 2010 तक यह सीट भाजपा के नियंत्रण में बनी रही।

चुनावी परिणाम में निर्णायक भूमिका

2015 के विधानसभा चुनाव में राजद ने एक बार फिर वापसी की, लेकिन 2020 में भाजपा उम्मीदवार मुरारी मोहन झा ने जीत दर्ज करते हुए सीट को पुनः अपने पक्ष में कर लिया। केवटी विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास दर्शाता है कि यहां मुकाबले कभी भी एकतरफा नहीं रहे हैं। इस क्षेत्र की राजनीति मुख्य रूप से जातीय समीकरणों पर आधारित रहती है। यादव, ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाता यहां के चुनाव परिणाम में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, रविदास और पासवान समुदाय का समर्थन भी उम्मीदवारों की जीत-हार तय करने में अहम होता है। यही वजह है कि सभी प्रमुख दल इस सीट पर अपनी रणनीति बनाते समय सामाजिक संतुलन और जातीय गणित का विशेष ध्यान रखते हैं।

केवटी विधानसभा क्षेत्र की कुल आबादी

चुनाव आयोग के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, केवटी विधानसभा क्षेत्र की कुल आबादी 5,07,911 है, जिनमें 2,67,199 पुरुष और 2,40,712 महिलाएं शामिल हैं। मतदाताओं की कुल संख्या 3,01,945 है, जिसमें 1,59,622 पुरुष और 1,42,318 महिला मतदाता हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि महिला मतदाता इस बार के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा अपनी परंपरागत बढ़त बनाए रख पाती है या राजद एक बार फिर सत्ता में वापसी करती है। पिछले चुनावी रुझानों से यह साफ झलकता है कि केवटी की सीट पर मुकाबले हमेशा कड़े और बेहद करीबी रहे हैं।

(इनपुट - आईएएनएस)

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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