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आजम खान के अपने भी अब छोड़ रहे हैं साथ, इस बार टूट जाएगा 40 साल का तिलस्म !

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 22, 2022, 03:37 PM IST

Azam Khan Close Aid Join BJP: फसाहत अली का समाजवादी पार्टी छोड़ना आजम खान के लिए बड़ा झटका है। उनका और आजम खान का करीब 17 साल पुराना नाता रहा है। उनकी वफादारी ऐसी थी कि जब आजम खान जेल में थे तो कई बार वह अखिलेश यादव को भी निशाने पर ले लेते थे।

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आजम खान पड़े अकेले !

Photo : PTI
KEY HIGHLIGHTS
  • 5 दिसंबर को होने वाला उप चुनाव आजम खान के रसूख और राजनीतिक विरासत के लिए, बेहद अहम साबित होगा।
  • लोक सभा में आजम खान को भाजपा दे चुकी है झटका।
  • आजम खान की विधानसभा सदस्यता जा चुकी है।

Azam Khan Close Aid Join BJP: लगता है, रामपुर में रहना है तो आजम-आजम कहना है का जुमला अब बदल रहा है। पहले तो आजम खान की विधान सभा सदस्यता गई, फिर वोटर लिस्ट से नाम कटा और अब उनके करीबी उनसे दूरी बना रहे हैं। आजम खान के बेहद करीबी और उनके मीडिया प्रभारी फसाहत अली खान उर्फ शानू ने उनका साथ छोड़ भाजपा ज्वाइन कर ली है। फसाहत अली का समाजवादी पार्टी छोड़ना आजम खान के लिए बड़ा झटका है। उनका और आजम खान का करीब 17 साल पुराना नाता रहा है। उनकी वफादारी ऐसी थी कि जब आजम खान जेल में थे तो कई बार वह अखिलेश यादव को भी निशाने पर ले लेते थे। लेकिन अब वह भाजपा में चले गए हैं, ऐसे में 5 दिसंबर को होने वाला उप चुनाव आजम खान के रसूख और राजनीतिक विरासत के लिए, बेहद अहम साबित होगा।

फसाहत अली खान ने कहा था हम सियासी यतीम हो गए

आजम खान और फसाहत अली खान का रिश्ता किस तरह का था, इसे फसाहत के उस बयान से समझा जा सकता है, जब उन्होंने अपने ही पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर सियासी हमला बोल दिया था। उन्होंने रामपुर में एक सभा में कहा था कि 'वाह राष्ट्रीय अध्यक्ष जी वाह, हमने आपको और आपके वालिद साहब (मुलायम सिंह) को चार बार प्रदेश का मुख्यमंत्री बनवाया।आप इतना नहीं कर सकते थे कि आजम खान साहब को नेता विपक्ष बना देते? वह यही नहीं रूके बोले आजम खां साहब के जेल से बाहर नही आने की वजह से हम लोग सियासी रूप से यतीम हो गए हैं। जाहिर है इस तरह की करीबी अब दूरी बन गई है। जिसका भाजपा फायदा उठाना चाहेगी। फसाहत के पहले घनश्याम सिंह लोधी भी आजम खान का दामन छोड़ भाजपा में शामिल हो चुके हैं। और उन्होंने उप चुनाव में रामपुर लोकसभा सीट पर आजम खान के करीबी मोहम्मद आसिम रजा को बड़ा झटका दिया था।

लोक सभा में आजम खान को लग चुका है झटका

80 की दशक से रामपुर की सियायत में आजम खान फैक्टर रहे हैं। और उसके बाद से उनका रसूख लगातार बढ़ता गया और वह 2012-2017 के दौरान समाजवादी सरकार में अपने सियासी चरम पर पहुंच गया था। लेकिन उत्तर प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आने के बाद उनकी राजनीतिक सितारे गड़बड़ाने लगे। और उन पर 87 केस दर्ज हो चुके हैं। जिसमें से एक मामले में उनकी विधान सभा सदस्या भी चली गई। और उसके बाद जून में हुए लोक सभा उप चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मोहम्मद आसिम रजा, भाजपा के उम्मीदवार घनश्याम सिंह लोधी से 42 हजार से ज्यादा के बड़े अंतर से चुनाव हार गए हैं। आसिम रजा आजम खान के बेहद करीबी थे।

उप चुनाव में भाजपा से आकाश सक्सेना उम्मीदवार

आजम खान के खिलाफ जो 80 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं, उनमें से ज्यादातर मामलों आकाश सक्सेना का हाथ रहा है। वह इस बार रामपुर सदर से हो रहे विधानसभा उप चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार हैं। और उनके खिलाफ सपा ने एक बार फिर मोहम्मद आसिम रजा को उम्मीदवार बनाया है। अगर इस बार भी सपा आसिम रजा की हार होती है, तो निश्चित है कि आजम खान की 40 साल पुरानी राजनीतिक विरासत, सबसे बुरे दौर में पहुंच चुकी होगी।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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