पराक्रम दिवस का इतिहास, महत्व
- Authored by: कुलदीप राघव
- Updated Jan 20, 2026, 03:42 PM IST
हर साल 23 जनवरी को देशभर में पराक्रम दिवस मनाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2021 में पराक्रम दिवस को मनाने की घोषणा की थी। पराक्रम दिवस का नाता भारत के प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस है।
Parakram Diwas 2025 Theme, Date, History
हर साल 23 जनवरी को देशभर में पराक्रम दिवस मनाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2021 में पराक्रम दिवस को मनाने की घोषणा की थी। भारत के हर नागरिक को यह मालूम होना चाहिए कि पराक्रम दिवस क्यों मनाया जाता है और इसे 23 जनवरी के दिन मनाने के पीछे क्या कारण है। अगर आप प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं तब तो आपको यह जरूर मालूम होना चाहिए। चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पराक्रम दिवस क्यों मनाया जाता है, पराक्रम दिवस की थीम क्या है, पराक्रम दिवस का इतिहास क्या है।
बता दें कि पराक्रम दिवस 2025 के अवसर पर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मस्थान ऐतिहासिक शहर कटक के बाराबती किले में 23 जनवरी से 25 जनवरी, 2025 तक एक भव्य उत्सव मनाया जाएगा। यह बहुआयामी उत्सव नेताजी की 128वीं जयंती पर उनकी विरासत का सम्मान करेगा। 23-25 जनवरी, 2025 के लिए निर्धारित तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन 23.01.2025 को ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा किया जाएगा।
23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती होती है और इस दिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में हुआ था। इनके पिता की नाम जानकीनाथ बोस और माता का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोल कटक के मशहूर वकील थे। सुभाष चंद्र बोस ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जिन्होंने देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई थी। इस दिन सुभाष चंद्र बोस को नमन किया जाता है और उनके योगदान को याद किया जाता है।

Subhas Chandra Bose
23 जनवरी को मनाया जाने वाला पराक्रम दिवस- भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में एक प्रमुख नेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2021 में पराक्रम दिवस को मनाने की घोषणा की थी।
भारत में हर साल साहस और वीरता का जश्न मनाया जाता है और इसी दिन को पराक्रम दिवस के नाम से जाना जाता है। साल 2024 में यह दिवस "नेताजी: नए भारत के लिए प्रेरणा" इस थीम के साथ मनाया गया था, जबकि 2025 में यह "नेताजी: साहस, दृढ़ संकल्प और देशभक्ति का सम्मान" है।

Subhas Chandra Bose
पराक्रम दिवस कैसे मनाया जाता है? (Parakram Diwas Celebration in Hindi)
- शैक्षिक कार्यक्रम: स्कूल और कॉलेज में नेताजी के जीवन और योगदान पर वाद-विवाद, निबंध और चर्चाएं होती हैं।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम: नाटक और प्रदर्शन सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम, उनके संघर्ष और उपलब्धियों पर कार्यक्रम।
- ध्वजारोहण: नेताजी की देशभक्ति का सम्मान करने के लिए विभिन्न संस्थानों में राष्ट्रीय ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया जाता है।
पराक्रम दिवस और सुभाष चंद्र बोस जयंती एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। पराक्रम दिवस 23 जनवरी को मनाया जाता है, जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है। पराक्रम दिवस का उद्देश्य युवाओं में सुभाष चंद्र बोस की वीरता और देशभक्ति की भावना को जागरूक करना है! यह दिन नेताजी के योगदान और उनके साहस को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है।