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CBSE Revaluation and Verification: वेरिफिकेशन और रिवैल्युएशन क्या है दोनों में अंतर, अच्छे पेपर में कम अंक आने पर क्या है बेहतर ऑप्शन

CBSE Revaluation and Verification: सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं। छात्र अब अपने नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच छात्रों के लिए यह जानना आवश्यक है कि सीबीएसई रिवैल्युएशन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया क्या होती है। अक्सर अच्छा पेपर होने पर भी छात्रों के अंक कम आते हैं, ऐसी स्थिति में आपको इन दो प्रक्रियाओं का सहारा लेना होता है। तो आइए इन दोनों के बीच क्या अंतर है जानें।

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वेरिफिकेशन और रिवॉल्यूशन क्या है दोनों में अंतर

CBSE Revaluation and Verification: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा समाप्त हो गई है। लेकिन अभी 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं जारी है। 10वीं परीक्षा के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद छात्रों का नतीजों को लेकर इंतजार शुरू हो गया है। रिजल्ट की घोषणा के बाद अक्सर देखा गया है कि कई छात्र कुछ विषयों में प्राप्त अंकों से असंतुष्ट होते हैं। क्योंकि उनका एग्जाम अच्छा गया होता है, लेकिन उसकी तुलना में मिले अंक कम होते हैं। ऐसे में छात्रों और उनके माता-पिता के मन में एक बड़ा सवाल होता है कि वह वेरिफिकेशन कराएं या रिवैल्युएशन करवाएं। इन दोनों में अंतर क्या होता है अगर आप यह समझ जाएंगे तो इसका फैसला भी आसान हो सकता है। आइए आपको दोनों के बारे में बताएं...

वेरिफिकेशन क्या है?

वेरिफिकेशन को मार्क्स वेरिफिकेशन भी कहा जाता है। अगर छात्र इसके लिए अप्लाई करते हैं तो बोर्ड द्वारा कॉपी में तीन चीजें चेक की जाती है। जो इस प्रकार है -

1. क्या सभी नंबरों की गणना में कोई गलती हुई है?

2. क्या आंसर शीट का कोई सवाल चेकिंग से छूट तो नहीं गया है?

3. क्या आंसर शीट के अंदर दिए गए नंबरों को बाहर मेन मार्कशीट में सही से चढ़ाया गया है?

छात्रों को जानकारी के लिए बता दें कि इसमें छात्रों के आंसर दोबारा चेक नहीं किए जाते है। केवल अंकों की कैलकुलेशन चेक की जाती है। इसे ही मार्क्स वेरिफिकेशन कहा जाता है। बता दें कि अंकों की पुनः गणना यानी वेरिफिकेशन के बाद दूसरा स्टेप आंसर शीट की फोटो कॉपी लेना होता है। इसके बाद आप चेक कर पाएंगी टीचर ने आपके नंबर कहां काटे है। इसके आधार पर आपके लिए यह तय करना आसान हो जाता है कि आपको आगे क्या करना है।

रिवैल्युएशन क्या होता है?

रिवैल्युएशन एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम होता है। यह सबसे अंतिम में चुना जाता है, जिसमें छात्र द्वारा दोबारा आंसर कॉपी को चेक करने के लिए आवेदन किया जाता है। इसमें अगर आपको लगता है कि कई उत्तर आपने सही लिखे हैं, लेकिन टीचर ने उस पर नंबर कम दिए हैं, तो उसको दोबारा चेक करने के लिए रिवैल्युएशन किया जाता है, जिसमें टीचर द्वारा दोबारा आंसर चेक किए जाते हैं। लेकिन इसमें सबसे बड़ी बात ये है कि अंक कम भी हो सकते हैं और बढ़ भी सकते हैं। इसलिए जब तक आप पूरी तरह से श्योर न हो तब तक रिवैल्यूएशन का फैसला न लें।

क्या मार्क्स वेरिफिकेशन के बाद रीवैल्यूएशन हो सकता है?

जी हां, मार्क्स वेरिफिकेशन की प्रक्रिया और आंसर शीट मंगाने के बाद यदि आपको लगता है बाद में की रिवैल्युएशन की आवश्यकता है तो आप उसके लिए आवेदन कर सकते हैं। छात्रों को सलाह है कि सीधे रिवैल्युएशन के लिए न जाएं। पहले वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करें और उसके बाद आंसर शीट की कॉपी जरूर लें। उसके बाद आप रीवैल्युएशन की प्रक्रिया के लिए आगे बढ़ सकता है।

CBSE रिवैल्युएशन और वेरिफिकेशन के लिए आवेदन कैसे करें?

अगर आप भी उन छात्रों में से हैं, जिन्हें लगता है कि पेपर अच्छा जाने पर भी अंक कम है और वेरिफिकेशन और रिवैल्युएशन के लिए जाना चाहते हैं, तो आप रिजल्ट जारी होने के बाद सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट से प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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