Atal Bihari Vajpayee Punyatithi 2025, Atal Bihari Vajpayee Biography In Hindi: हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा काल के कपाल पर लिखता (Atal Bihari Vajpayee Puniatithi 2025) मिटाता हूं। गीत नया गाता हूं, गीत नया गाता हूं। महान राष्ट्रवादी, प्रखर वक्ता, फौलादी हौसले, बेमिसाल अंदाज और दिल को छू लेने वाली शख्सियत भारतीय राजनीति के युगपुरुष पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से तो आप सब (Atal Bihari Vajpayee Biography) वाकिफ होंगे। अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय राजनीति का भीष्म पितामह भी कहा जाता है। उन्होंने करीब 5 दशक तक सियासत पर अपनी अमिट (Atal Bihari Vajpayee Biography In Hindi) छाप छोड़ी। संसदीय मर्यादा का पालन करने वाले वह एक ऐसे व्यक्ति थे जो विपक्ष में रहकर भी सरकार का समर्थन करते थे। उन्हें भारतीय राजनीति का अजातशुत्र भी कहा जाता था। आज अटल बिहारी वाजपेयी की 7वीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन 2018 में 93 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था।
लगातार 12 बार सांसद रहने का रिकॉर्ड
अटल जी भारतीय राजनीति के दिग्गज नेताओं में से एक थे। करीब 10 बार लोकसभा और 2 बार राज्यसभा के सासंद रहे। वह पहले ऐसे गैर कांग्रेसी व्यक्ति थे जो लगातार तीन बार प्रधानमंत्री रहे। पहली बार 13 दिन के लिए, दूसरी बार 8 महीने के लिए तीसरी बार उन्होंने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया। सरकार में रहे या फिर विपक्ष में अपने फैसलों से उन्होंने हमेशा देश को गौरवान्वित किया। एक ओर भारत देश को परमाणु संपन्नता में शिखर पर पहुंचाया तो वहीं दूसरी ओर कारगिल के युद्ध में पाकिस्तान को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया। ऐसे में आइए जानते हैं स्वतंत्रता सेनानी से लेकर एक राजनेता और कवि तक अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें। (फोटो आभार: PTI)

Atala Bihari Vajpayee 1.
शुरुआती शिक्षा से लेकर राजनेता तक की कहानी
अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ। अटल जी के पिता श्रीकृष्ण वाजपेयी ग्वालियर रियासत के शिक्षक थे, वह मूलरूप से आगरा के रहने वाले थे। भाई बहनों में सबसे छोटे अटल बिहारी की शुरुआती शिक्षा ग्वालियर के सरस्वती शिशु मंदिर से शुरू हुई। जब वह 10 साल के हुए तो उनका दाखिला उज्जैन के बाड़मेर जिले में एंग्लो वर्नाकुलर मिडिल स्कूल में हुआ, क्योंकि उनके पिता का ट्रांसफर हो गया था। वहीं उनकी बीए की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में हुई, जिसे वर्तमान में लक्ष्मीबाई कॉलेज के नाम से जाना जाता है। इसके बाद 1945 में उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज में राजनीति शास्त्र से एमए में दाखिला लिया। 1947 में एमए की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसी कॉलेज में एलएलबी में एडमिशन लिया। इसमें दिलचस्प बात यह थी कि उनके पिता ने भी उनके साथ यहां एलएलबी में दाखिला लिया था। हालांकि इस कोर्स को वह बीच में छोड़कर पत्रकारिता के क्षेत्र में आ गए। आपको शायद ही पता होगा कि अटल बिहारी ना केवल कुशल राजनेता व प्रखर वक्ता थे बल्कि वह एक संपादक भी थे। (फोटो आभार: PTI)

Atala Bihari Vajpayee Biography In Hindi
छात्र जीवन से ही राजनीति में रुचि
बता दें अटल जी को छात्र जीवन से ही राजनीति में विषेष रुचि थी। उनकी राजनीतिक कौशलता कॉलेज के दिनों से ही सामने आने लगी थी। विक्टोरिया कॉलेज में पढ़ाई के दौरान अटल बिहारी कॉलेज के संघ मंत्री और उपाध्यक्ष भी बने। कहा जाता है कि उनकी सक्रियता ग्वालियर में आर्य समाज आंदोलन की युवा शाखा आर्य कुमार सभा से शुरू हुई। वर्ष 1944 में वह इस सभा के महासचिव भी बने। (फोटो आभार: PTI)

Atala Bihari Vajpayee Jeevani
छात्र जीवन से आरएसएस से जुड़ाव
अटल जी का परिवार पहले से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से प्रेरित था। इसलिए छात्र जीवन में ही साल 1939 में वह आरएसएस से जुड़ गए और तभी से वह राष्ट्रीय स्तर की वाद विवाद प्रतियोगिता में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। कहा जाता है कि बाबा साहब आप्टे से प्रभावित होकर उन्होंने 1940 से 1944 के दौरान संघ के अधिकारी प्रशिक्षण सिविर में हिस्सा लिया और 1947 में प्रचारक बन गए। यही वह समय था जब भारत करीब 200 वर्षों तक ब्रिटिश उपनिवेश का दंश झेलने के बाद आजाद हुआ था और देश बंटवारे के त्रासदी से गुजर रहा था। बंटवारे के चलते दंगों के कारण उन्होंने कानून की पढ़ाई को बीच में ही छोड़ दी। (फोटो आभार: PTI)

Atala Bihari Vajpayee Biography
यहां शुरू हुई राजनीतिक यात्रा
इसके बाद उन्होंने अपना करियर एक पत्रकार के रूप में शुरू किया। कहा जाता है कि इसके बाद उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अखबार पंचजन्य और राष्ट्रधर्म आदि में काम किया। हालांकि कुछ ही समय बाद 1951 में वह भारतीय जनसंघ में शामिल हो गए। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया। इसी वर्ष 21 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने दक्षिणपंथी राजनीतिक दल की नींव रखी थी। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं दीनदयाल उपाध्याय और प्रोफेसर बलराज मधोक इसके संस्थापक संघ थे। इस दौरान संघ ने ब्रिटिश राज के शासनकाल के दौरान शुरू किए गए अपने काम को जारी रखने और अपनी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए एक राजनीतिक दल के गठन पर विचार करना शुरू कर दिया था। संघ के सहयोग से दिल्ली में भारतीय जनसंघ की शउरुआत हुई। यहीं से अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत हुई।
