दिल्ली में अवैध निर्माण और कब्जों पर चलने लगा बुलडोजर, SDMC ने  यहां लिया एक्शन- VIDEO

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated May 4, 2022, 03:48 PM IST

Bulldozer in Tughlakabad Delhi: दिल्ली में अवैध निर्माणों और कब्जों पर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम यानी MCD का एक्शन शुरू हो गया है।

दिल्ली में अवैध निर्माण और कब्जों पर चलने लगा बुलडोजर, SDMC ने  यहां लिया एक्शन- VIDEO
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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) ने बुधवार को अतिक्रमण विरोधी एक अभियान शुरू किया। एसडीएमसी की यह कार्रवाई शाहीन बाग सहित उसके अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों में अवैध निर्माण हटाने की दस दिन की कार्य योजना का हिस्सा है।

एसडीएमसी के अध्यक्ष, मध्य जोन, राजपाल सिंह ने बताया कि अभियान में बुलडोजर का इस्तेमाल किया जा रहा है और यह अभियान संगम विहार इलाके के एमबी रोड पर करणी सिंह शूटिंग रेंज से शुरू हुआ तथा यह अलग अलग इलाकों में 13 मई तक चलेगा।

यह अभियान अब यहां चलेगा-

शाहीन बाग मुख्य सड़क

कालिंदी कुंज

 एमबी रोड

मेहरचंद मार्केट

श्रीनिवास पुरी

खाड़ा कॉलोनी  में चलाया जाएगा। सिंह ने कहा, 'हमने शाहीन बाग सहित इन इलाकों से अतिक्रमण हटाने के लिए दस दिन की कार्य योजना तैयार की है। हमने अभियान चलाने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी उपलब्ध कराए जाने की भी मांग की है। हम शाहीन बाग में नौ मई को अभियान चलाएंगे।'

उन्होंने कहा कि कालिंदी कुंज और श्रीनिवास पुरी में पांच और छह मई को अतिक्रमण हटाया जाएगा। दस मई को न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के पास गुरुद्वारा रोड के समीप अभियान चलाया जाएगा। मेहरचंद मार्केट, साईं बाबा मंदिर के पास लोधी कॉलोनी में और जेएलएन मेट्रो स्टेशन के पास 11 मई को अभियान चलाया जाएगा।

एसडीएमसी के एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'यह अतिक्रमण हटाने की हमारी नियमित योजना है। समस्त कार्रवाई पुलिस बल की उपलब्धता पर भी निर्भर करेगी।'

शाहीन बाग SDMC के अधिकार क्षेत्र में आता है

गौरतलब है कि शाहीन बाग एसडीएमसी के अधिकार क्षेत्र में आता है और इस इलाके में दिसंबर 2019 में संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में लंबे समय तक धरना - प्रदर्शन चला था। यह धरना - प्रदर्शन कोविड महामारी के फैलने के बाद मार्च 2020 में समाप्त हुआ था। उत्तरी दिल्ली नगर निगम (NDMC) ने जहांगीरपुरी इलाके में सांप्रदायिक हिंसा के चार दिन बाद अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया था जिसकी व्यापक आलोचना हुई थी। उच्चतम न्यायालय ने एनडीएमसी को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।

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