क्राइम

राजा रघुवंशी मर्डर केस में नए शख्स की एंट्री! सोनम ने आखिर किसे की महीने भर में 234 बार कॉल

राजा रघुवंशी मर्डर केस में नया खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक सोनम ने एक संजय वर्मा नाम के शख्स से एक महीने में 234 बार बातचीत की है।

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राजा हत्याकांड मामले में नए शख्स की हुई एंट्री।

Raghuvanshi murder case: इंदौर के राजा रघुवंशी मर्डर केस में अब एक नए शख्स की एंट्री हो गई है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले की आरोपी सोनम ने इस शख्स से सैंकड़ों बार बातचीत की है और 8 जून को ये नंबर ऑफलाइन हो गया। पुलिस अब इस मामले को इस एंगल से भी जांचने में जुट गई है कि आखिर सोनम ने इस शख्स से करीब एक महीने में सैंकड़ों बार बातचीत क्यों की ।

सूत्रों के मुताबिक यह पता चला है कि यह मोबाइल ट्रू कॉलर पर संजय वर्मा के नाम से रजिस्टर्ड है। पुलिस इस नंबर की जांच करने में जुटी है। फर्जी नाम से भी सिम होने की आंशका है हालांकि इस मामले की अधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं की गई है।

कितनी बार हुई बातचीत?

बताया जा रहा है कि संजय वर्मा के नाम के शख्स से सोनम ने की सैंकड़ों बार बात की है। एक महीने में कुल सोनम ने इस शख्स से 234 बार बातचीत की है। यह पूरी बातचीत 1 मार्च से लेकर 8 अप्रैल के बीच की गई है। 8 जून को रात 11 बजकर 20 मिनट पर यह नंबर ऑफलाइन यानी बंद हो गया। गौर हो कि 8 जून की रात को ही सोनम यूपी के गाजीपुर में मिली थी ।

राजा रघुवंशी का शव 2 जून को मिला था

मेघालय में हनीमून मनाने गए राजा रघुवंशी की 23 मई को साजिशन हत्या में शामिल होने के आरोप में उनकी पत्नी सोनम, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाह (20) और कुशवाह के तीन दोस्तों- विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी को गिरफ्तार किया गया है। रघुवंशी, मेघालय में हनीमून के दौरान 23 मई को लापता हो गए थे और उनका क्षत-विक्षत शव पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा क्षेत्र (जिसे चेरापूंजी भी कहा जाता है) में एक झरने के पास गहरी खाई में दो जून को मिला था।

8 जून को सोनम ने सरेंडर किया

सोनम ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में पुलिस के सामने आठ जून को देर रात आत्मसमर्पण कर दिया, जबकि कुशवाह समेत चार आरोपियों को मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार किया गया था। राजा रघुवंशी का परिवार ट्रांसपोर्ट के कारोबार से जुड़ा है। उनकी सोनम से शादी 11 मई को इंदौर में हुई थी और वे 20 मई को हनीमून के लिए मेघालय रवाना हुए थे। मेघालय पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) राजा रघुवंशी की हत्या के मामले की विस्तार से तहकीकात कर रहा है। (एजेंसी इनपुट के साथ)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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