वाराणसी

काशी के कारीगरों के हुनर को दुनिया में मिली नई पहचान, PM मोदी और CM योगी ने बनाया बाजार

Banarasi Saree: बनारसी साड़ी को जीआई टैग मिलने से इसे विश्व में नई पहचान मिली है। योगी सरकार ने बनारसी साड़ी को ओडीओपी में शामिल कर काशी के कारीगरों के हुनर को अंतरराष्ट्रीय उड़ान दी। काशी की जीआई और ओडीओपी उत्पाद बनारसी साड़ी अंबानी परिवार की शादी में रंग बिखेरेगी।

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पीएम और सीएम ने शिल्पियों के हुनर को दिया नया बाजार।

Photo : Times Now Digital

Varanasi News: काशी की जीआई और ओडीओपी उत्पाद बनारसी साड़ी अंबानी परिवार की शादी में रंग बिखेरेगी। काशी की इस प्राचीन कला को जीआई टैग मिलने से विश्व में बनारसी साड़ी को अलग ही पहचान मिली है। योगी सरकार द्वारा बनारसी साड़ी को वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट में शामिल करने से काशी के कारीगरों का हुनर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उड़ान भर रहा है।

दुनियाभर में बढ़ती जा रही है बनारसी साड़ी की डिमांड

बनारसी साड़ी को नई पहचान मिलने के बाद इसकी ख्याति और बढ़ती जा रही है। फिल्म इंडस्ट्री हो या देश दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक घराने, बनारसी साड़ी सबको खूब भाती है। वहीं बेटे की शादी के लिए नीता अंबानी ने भी इसी खास बनारसी साड़ी का ऑर्डर दिया है।

पीएम-सीएम ने शिल्पियों के हुनर को दिया नया बाजार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीआई उत्पाद व वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट के ब्रांड अंबेसडर के रूप में देश के शिल्पियों के हुनर को नया बाज़ार दिया है। देश के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में शुमार मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी अपने बेटे की शादी के लिए यह साड़ी खरीदने कुछ दिन पहले बनारस पहुंची थीं। नीता अंबानी साड़ी की दुकान से लेकर बुनकर के घर तक गईं। उन्होंने करघे पर बुनकरों की बुनाई करते हुए कारीगरी को भी देखा। साथ ही बनारसी साड़ी के कारीगरों से इसकी बारीकियां भी समझीं।

जीआई एक्सपर्ट पद्मश्री डॉ रजनीकांत ने बताया कि जीआई टैग की बनारसी साड़ी 100 प्रतिशत हैंडलूम और सिल्क की होती है। नीता अंबानी ने पसंद किया है। अब अंबानी परिवार की ओर से बनारसी साड़ी को पसंद किये जाने से दुनिया में इसका आकर्षण बढ़ेगा। बनारसी परंपरागत वस्त्रों के साथ ही जीआई और ओडीओपी उत्पादों के सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर प्रधानमंत्री और सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ हैं, जिन्होंने इसका विस्तार पूरी दुनिया में किया है।

बेटे की शादी के लिए नीता अंबानी ने दिया है ऑर्डर

नीता अंबानी ने बेटे की शादी के लिए ढेर सारी बनारसी साड़ियों का आर्डर दिया है। साड़ी के व्यापारी और एक्सपोर्टर प्रवीण अग्रवाल बताते हैं कि बनारसी साड़ी को जीआई उत्पाद में शामिल होने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इसे ओडीओपी में शामिल करने से पुरातन कला और बुनकरों को नया जीवन मिला है। अंबानी परिवार की इस शादी में जब बनारसी साड़ी पहनी जाएगी, तब इसकी चर्चा पूरी दुनिया में फिर से होगी। इससे बनारसी साड़ी का बाजार एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय फलक छुएगा।

सुविधा साड़ी के मालिक और युवा उद्यमी अमित शेवारामानी बताते हैं कि मुकेश अंबानी के बेटे की शादी में विश्व भर के उद्योगपति, सेलिब्रटी और विभिन्न क्षेत्रों के शीर्षस्थ लोगों के बीच बनारसी साड़ी को एक बार फिर नई बुलंदी और हुनरमंद कारीगरों को काम मिलेगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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