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'ऑपरेशन कालनेमि, धर्मांतरण पर सख्ती और मदरसा बोर्ड का खात्मा', धामी सरकार ने उठाए 3 बड़े कदम

Uttarakhand Govt Decisions: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऑपरेशन कालनेमि, धर्मांतरण विरोधी कानून में सख्ती के साथ ही मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्णयों को भाजपा शासित राज्यों के लिए गर्वनेंस के एक आदर्श मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है।​

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (फोटो साभार: @pushkardhami)

Photo : Twitter

Uttarakhand Govt Decisions: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऑपरेशन कालनेमि, धर्मांतरण विरोधी कानून में सख्ती के साथ ही मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया है। मुख्यमंत्री धामी, आरएसएस के जिस कोर एजेंडे पर चल रहे हैं, उसे भाजपा शासित राज्यों के लिए गर्वनेंस के एक आदर्श मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है।

ऑपरेशन कालनेमि

मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर उत्तराखंड पुलिस ऑपरेशन कालनेमि संचालित कर रही है। इस अभियान के तहत अब तक 4000 से ज्यादा संदिग्ध लोगों का सत्यापन किया जा चुका है जिनमें से एक बांग्लादेशी समेत 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अकेले हरिद्वार से 162 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि देहरादून में एक बांग्लादेशी धार्मिक चोला ओढ़कर अपनी पहचान छिपाते हुए पकड़ा गया।

अवैध धर्मांतरण पर सख्ती

धामी सरकार ने धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों को रोकने के लिए "उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2025" भी विधानसभा से मंजूर करवा दिया है। संशोधित कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति धन, उपहार, नौकरी, शादी का झांसा देकर किसी का धर्म परिवर्तन कराता है तो उसे अपराध की श्रेणी में गिना जाएगा। यदि कोई व्यक्ति शादी के इरादे से अपना धर्म छुपाता है, तो उसे तीन साल से 10 साल तक की सजा और तीन लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।

महिला, बच्चा, एससी- एसटी, दिव्यांग या सामुहिक धर्मांतरण कराने के अपराध में अधिकतम 14 साल की जेल का प्रावधान किया गया है। इसी तरह धर्मांतरण के लिए विदेशी धन लेने पर सात से 14 साल की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये का जुर्माना, जबकि जीवन भय दिखाकर धर्म परिवर्तन कराने जैसे मामले में 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन के जरिए संपत्ति अर्जित करता है तो जिला मजिस्ट्रेट उसे जब्त कर सकता है।

मदरसा बोर्ड का खात्मा

धामी सरकार ने एक और अहम कदम उठाते हुए अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के दर्जे पर मुस्लिम समाज का एकाधिकार समाप्त कर दिया है। इसके लिए गैरसैंण सत्र में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान विधेयक, 2025 पारित हो चुका है। अब सिख, ईसाई, जैन सहित सभी अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक समुदायों को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा हासिल हो सकेगा। इसी के साथ कैबेनिट ने उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2016 तथा उत्तराखंड गैर-सरकारी अरबी और फारसी मदरसा मान्यता नियम, 2019 को एक जुलाई, 2026 से निरस्त करने का निर्णय लिया है। राज्य में उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जो अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को दर्जा प्रदान करेगा।

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