Prayagraj News: प्रयागराज के सिविल लाइंस इलाके में शनिवार को छात्रों के आंदोलन की आड़ में हुई हिंसा और गाड़ियों में तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पकड़े गए आरोपियों का छात्र राजनीति या किसी प्रतियोगी परीक्षा से कोई दूर-दूर तक वास्ता नहीं है।
ADCC सिटी (प्रयागराज) मनीष कुमार शांडिल्य के अनुसार, गिरफ्तार किए गए उपद्रवी पेशेवर अपराधी, स्थानीय दुकानदार और असामाजिक तत्व हैं जो आंदोलन की आड़ में हिंसा भड़काने पहुंचे थे।
फल विक्रेता से लेकर हिस्ट्रीशीटर तक शामिल
पुलिस द्वारा खंगाले गए बैकग्राउंड के बाद जेल भेजे गए 10 आरोपियों की सूची सामने आई है। इनमें नैनी थाने का एक हिस्ट्रीशीटर आशीष यादव, ओयो होटल संचालक अवनीश यादव, अमर यादव होटल सफाई कर्मी और फल-सब्जी विक्रेता अभिषेक सोनकर समेत दिलशाद, शिवम कुमार यादव, कारगिल सिंह, मोहम्मद सूफियान, मोहम्मद वैस और संदीप कुमार शामिल हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की जा रही है और सपा विधायक विजमा यादव की पैरवी का भी इस सख्त कानूनी कार्रवाई पर कोई असर नहीं हुआ।
भाजपा झंडा लगी गाड़ियों और परिवारों को बनाया निशाना
गौरतलब है कि शनिवार को सिविल लाइंस में शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन के दौरान अचानक उपद्रव शुरू हो गया था। उपद्रवियों ने कई वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की। हद तो तब हो गई जब एक गाड़ी में जा रहे परिवार का सामान बाहर फेंक दिया गया और वाहन को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विशेष रूप से जिन गाड़ियों पर भाजपा का झंडा लगा था, उन्हें चुन-चुनकर निशाना बनाया गया।
तीन FIR दर्ज, अन्य संदिग्धों की तलाश जारी
सिविल लाइंस थाने में बांदा के पूर्व सांसद रोहित द्विवेदी और प्रशांत पाठक समेत अन्य पीड़ितों की तहरीर पर अलग-अलग 3 FIR दर्ज की गई हैं। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और वीडियो सर्विलांस के जरिए अन्य संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है। इस घटना ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या छात्रों के जायज आंदोलन को भड़काने के लिए बाहरी तत्वों द्वारा सोची-समझी साजिश रची गई थी।
