यूपी में आज का मौसम (12 Feb 2026): उत्तर प्रदेश में मौसम एक बार फिर अपनी चाल बदलने की तैयारी में है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान बताते हैं कि यूपीवालों को फरवरी के मध्य में ही मौसम के दो अलग-अलग रंग देखने को मिलेंगे। जहां एक ओर सूरज की तपिश दिन के तापमान को बढ़ाएगी, वहीं दूसरी ओर हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के कारण बादलों की गर्जना और बारिश फिर से सिहरन पैदा कर सकती है।
तापमान में उछाल और तीखी धूप का दौर
मौसम विभाग के अनुसार 12 से 16 फरवरी के बीच प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पारा चढ़ने की उम्मीद है। इस दौरान राजधानी लखनऊ समेत पूर्वी और पश्चिमी यूपी के सभी 75 जिलों में आसमान साफ रहने और खिली हुई धूप निकलने का अनुमान है। धूप की तेजी के कारण अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच सकता है, जिससे लोगों को दिन के समय हल्की गर्मी का अहसास होने लगेगा। बीते 24 घंटों के दौरान बांदा जिला 29.8 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे गर्म इलाका रिकॉर्ड किया गया है, जो इस बात का संकेत है कि सर्दियां अब विदा होने की राह पर हैं।
पश्चिमी विक्षोभ और बारिश की वापसी
गर्मी का यह अहसास ज्यादा समय तक टिकने वाला नहीं है क्योंकि 13 और 16 फरवरी को एक के बाद एक दो नए पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्र से टकराने वाले हैं। इनका सबसे ज्यादा असर 17 फरवरी के आसपास देखने को मिलेगा, जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आसमान पर काले बादलों का डेरा होगा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सिस्टम के सक्रिय होने से मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ आंधी चलने की भी संभावना है। इस मौसमी बदलाव से पारे में एक बार फिर गिरावट आएगी और ठंड का हल्का असर दोबारा लौट सकता है।
प्रमुख शहरों और किसानों के लिए चेतावनी
राजधानी लखनऊ और दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में फिलहाल सुबह और शाम के वक्त ही हल्की गुलाबी ठंड का अहसास होगा, जबकि दोपहर के समय धूप तीखी लगेगी। हालांकि, पश्चिमी यूपी के जिलों जैसे कि मथुरा, आगरा, अलीगढ़ और शामली में बारिश होने की स्थिति में कोहरा और ठंड फिर से कोहराम मचा सकते हैं। मौसम के इस उतार-चढ़ाव को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अपनी फसलों के रखरखाव के प्रति विशेष सावधानी बरतने को कहा है। सिंचाई और कटाई जैसे कार्यों को बारिश के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर ही करने की सलाह दी गई है ताकि अचानक होने वाली बरसात से फसलों को नुकसान न हो।
