Akhilesh Yadav And Azam Khan: यूपी चुनाव 2027 की सरगर्मी जोर पकड़ चुकी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बीजेपी से मुकाबले के लिए हर पैंतरा और रणनीति अपना रहे हैं। इसी सिलसिले में अखिलेश रामपुर जेल बंद आजम खान से आज मुलाकात करने जा रहे हैं। अखिलेश पश्चिमी यूपी में टिकट बंटवारे को लेकर आजम से चर्चा करेंगे। आजम के मशविरे पर बीते विधानसभा चुनाव में अखिलेश ने मुरादाबाद मंडल में टिकट दिए थे।
27 सीटों में से सपा ने जीती थी 17 सीटें
ऐसे में कांग्रेस के साथ गठबंधन में मुरादाबाद मंडल में कांग्रेस के दावे और सपा की मजबूती में कैसे संतुलन बिठाया जाए, इस पर भी आजम से अखिलेश चर्चा करेंगे। सपा जौहर विश्वविद्यालय पर हो रही कार्रवाई को मुद्दा बना सकती है। शैक्षिणिक संस्थाओं पर राजनैतिक बदले की भावना से हो रही कार्रवाई को आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश रहेगी। अखिलेश दोपहर 1 बजे तक रामपुर पहुंचेंगे।
निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक, अखिलेश यादव का हेलीकॉप्टर दोपहर करीब 12:30 बजे जौहर यूनिवर्सिटी के हेलीपैड पर उतरेगा। इसके बाद वह सड़क मार्ग से रामपुर जिला जेल पहुंचेंगे, जहां दोनों नेताओं के बीच लगभग 45 मिनट तक बैठक होने की संभावना है। जेल में मुलाकात के बाद अखिलेश यादव सीधे आजम खान के आवास पर जाएंगे। वहां वे आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा और उनके परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात कर उनका हालचाल जानेंगे।
राजनीतिक मायने और सियासी समीकरण
हाल ही में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा रामपुर में की गई जनसभा और मुस्लिम वोट बैंक को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बाद अखिलेश यादव के इस दौरे के बड़े राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। विपक्षी दलों द्वारा आजम खान के मुद्दे पर लगातार सरकार को घेरने और सपा के रुख पर सवाल उठाने के बीच, अखिलेश का यह कदम पार्टी के भीतर और बाहर कड़ा संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है। सपा नेताओं का कहना है कि पार्टी पूरी मजबूती से आजम खान और उनके परिवार के साथ खड़ी है। इस मुलाकात से राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है।
निषाद पार्टी की सियासत
उधर, दिल्ली में हुई निषाद पार्टी के सम्मेलन के बाद अब संजय निषाद, निषाद समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू करेंगे। निषाद ने बीजेपी, सपा, कांग्रेस सभी दलों से निषादों की मांगों को समर्थन देने की अपील की है। इसे चुनाव से पहले संजय निषाद की आरक्षण की सियासत माना जा रहा है। राशन नहीं शासन की मांग पर आगे बढ़ेगी निषाद पार्टी। इसे एनडीए में सीट बंटवारे से पहले निषाद पार्टी की दवाब बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
