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दान की हुंडियों में खेला दांवपेंच! तिरुपति बालाजी मंदिर का क्लर्क ऐसे बन गया करोड़पति

तिरुपति के क्लर्क रवि कुमार ने 20 सालों में मंदिर की दान राशि से करोड़ों रुपये चुपचाप चुरा लिए और 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जमा की। इस मामले को लोक अदालत में विवादास्पद रूप से निपटाया गया था अब आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में ये मामला दोबारा शुरु हुआ है।

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AI के द्वारा बनाई गई तस्वीर

तिरुपति: आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर भारत के सबसे अमीर मंदिरों में शुमार होता है जहां सालाना अरबों रुपए का दान,चढ़ावा आदि आता है जिसे एक खास तरह की बनी हुंडियों में श्रद्धालु दान करते हैं । यहां रोजाना 60 हजार से एक लाख श्रद्धालु दर्शन करने आते है। मंदिर में बनी इन हुंडियों में श्रद्धालु रुपये, डॉलर, सोना, गहने और यहां तक कि मोबाइल फोन तक भी इस दान की हुंडियों में चढ़ाते हैं जो दान के लिए रखा गया एक पवित्र बर्तन होताहै। लेकिन अधिकांश श्रद्धालुओं को यह नहीं पता था कि मंदिर का एक क्लर्क रवि कुमार इन दान राशियों से चुपचाप रुपये चुरा रहा था और ये बताया जा रहा है कि 20 साल में वह इस चोरी की बदौलत करोड़पति बन गया।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक क्लर्क रवि कुमार को मंदिर में होनेवाले दान की दैनिक गिनती की निगरानी करने का कार्य सौंपा गया था जो 4 करोड़ से 16 करोड़ रुपये के बीच होती थी। तीन दशकों से अधिक समय तक उसने मेहनती कार्यकर्ता के रुप में खुद को साबित किया।

सीसीटीवी कैमरों से पकड़ी गई चोरी

लेकिन 29 अप्रैल, 2023 को एक नई तस्वीर सामने आई। एक सुरक्षा गार्ड ने सीसीटीवी फुटेज की निगरानी में रवि कुमार का अजीब व्यवहार अजीब पाया लिहाजा उसके इन हरकतों की वजह से उसपर शक हुआ। 22,000 वर्ग फीट का परिसर जिसमें मंदिर की दान राशि 108 कैमरों के नीचे रखी गई थी। सर्च के दौरान उसके पास से नौ 100 डॉलर के नोट छिपे हुए मिले। जांच के दौरान अधिकारियों को इस घटना ने चौंका दिया कथित तौर पर और फिर रवि कुमार ने 20 वर्षों से मंदिर में चोरी करने की बात मान ली। दान वाले इस चोरी के पैसे का इस्तेमाल करते हुए रवि कुमार ने तिरुपति, चेन्नई और हैदराबाद में कई संपत्तियां खरीदीं।

जांच में बरी हुई रवि कुमार

19 मई, 2023 को रवि कुमार और उनकी पत्नी ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को सात संपत्तियां (पांच तिरुपति में, दो चेन्नई में) दान की और यह दावा किया कि वह ऐसा भक्तिभाव से दान का कार्य कर रहे हैं। TTD के अध्यक्ष YV सुब्बा रेड्डी ने दान को मंजूरी दी। 30 मई तक तिरुमाला पुलिस ने चार्जशीट दायर की लेकिन कुछ ही महीनों बाद 9 सितंबर को रवि कुमार और शिकायतकर्ता TTD के सहायक सतर्कता अधिकारी सतीश कुमार लोक अदालत में समझौते के लिए पहुंचे। इस जांच में रवि कुमार बरी हो गए।

टीडीपी के सत्ता में आने के बाद दोबारा शुरु हुई जांच

2024 में जब चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी ने आंध्र प्रदेश की सत्ता संभाली तो जांच तेज हो गई। सतीश कुमार ने बाद में दावा किया कि उन्होंने पुलिस के अत्यधिक दबाव के तहत समझौते पर सहमति दी थी। लोक अदालत के निर्णय को चुनौती देते हुए तिरुपति के पत्रकार एम श्रीनिवास राव ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की ।

19 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट ने आदेश को रद्द कर दिया और CID को सभी मामले के रिकॉर्ड को जब्त करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होनी है। पूर्व TTD अध्यक्ष भुमाना करुणाकर रेड्डी ने बताया कि इन परिस्थितियों में 40 करोड़ रुपये की संपत्ति का दान उचित था। हालांकि वर्तमान TTD अध्यक्ष BR नायडू और BJP बोर्ड के सदस्य जी भानु प्रकाश रेड्डी ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना की और कहां कि आखिर जांच क्यों नहीं की गई। यह बताया गया कि रवि कुमार के पास अभी भी सात अतिरिक्त संपत्तियां और लक्जरी वाहन हैं जिनमें एक मर्सिडीज बेंज और वोल्वो शामिल हैं।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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