अयोध्या : राम जन्मभूमि मंदिर दान गबन मामले में पहली एफआईआर दर्ज होने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मामले में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं हैं तो जांच और कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। संजय सिंह ने कहा कि सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि एफआईआर में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम है या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि दान गबन मामले में सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन्हीं की बनती है।
AAP सांसद ने कहा, "क्या चंपत राय का नाम एफआईआर में है या नहीं? सबसे पहले यह बताया जाए। क्या अनिल मिश्रा का नाम है? क्या गोपाल राव का नाम है? क्या जिन लोगों पर सबसे बड़े आरोप हैं, उनके नाम एफआईआर में शामिल किए गए हैं? उन्होंने कहा कि एफआईआर की प्रति देखने के बाद वह विस्तृत प्रतिक्रिया देंगे, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि मामले के मुख्य आरोपियों को जांच के दायरे से बाहर रखा गया है।
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संजय सिंह ने आगे आरोप लगाया कि चंपत राय के खिलाफ पहले भी भूमि सौदे से जुड़े विवादों में सवाल उठ चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि जिस अवधि में कथित दान गबन हुआ, उस दौरान ट्रस्ट का संचालन और व्यवस्था उनके नेतृत्व में थी। उन्होंने कहा, "क्या सबसे बड़े आरोपी चंपत राय के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है? यदि नहीं, तो फिर कार्रवाई किस पर हो रही है?"
AAP सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने से लोग डर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हर कोई चंपत राय से डरता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस मामले में वास्तव में निष्पक्ष जांच हो पाएगी और क्या किसी बड़े व्यक्ति की गिरफ्तारी होगी?"
गौरतलब है कि राम मंदिर दान राशि गबन मामले में अयोध्या कोतवाली में पहली एफआईआर दर्ज की गई है। यह एफआईआर एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुई है। मामले में आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है, जबकि अन्य अज्ञात लोगों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। हालांकि एफआईआर में ट्रस्ट के किसी सदस्य या पदाधिकारी का नाम शामिल नहीं है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और जांच एजेंसियों का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
