इस्तीफा देने वाले डिप्टी कमिश्नर GST प्रशांत कुमार सिंह को फर्जी विकलांग सर्टिफिकेट से मिली नौकरी! सगे भाई ने लगाए गंभीर आरोप
- Reported by: विनोद मिश्राEdited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 27, 2026, 10:25 PM IST
डॉ. विश्वजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि प्रशांत कुमार सिंह जांच और संभावित रिकवरी से बचने के लिए इस्तीफे का नाटक कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशांत सिंह ने खुद को 40 प्रतिशत नेत्रहीन बताते हुए फर्जी नेत्र विकलांगता प्रमाणपत्र बनवाया और इसी आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की।
इस्तीफा देने वाले जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह। तस्वीर-टाइम्स नाउ नवभारत
अयोध्या में तैनात जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे के बाद अब नौकरी हासिल करने के लिए लगाए गए सर्टिफिकेट को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। उनके सगे बड़े भाई डॉ विश्वजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि प्रशांत कुमार सिंह ने फर्जी विकलांग सर्टिफिकेट लगाकर नौकरी हासिल की है। भाई का आरोप है कि इस्तीफे का नाटक करके प्रशांत सिंह जांच और रिकवरी से भाग रहे हैं। वहीं, मामले में सगे भाई के द्वारा शिकायत के बाद जांच जारी है।
बता दें कि इससे पहले, प्रशांत कुमार ने अपना इस्तीफा राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को भेजा था। राज्यपाल को भेजे अपने दो पन्ने इस्तीफे में प्रशांत कुमार ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा दे रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि शंकराचार्य ने सीएम योगी पर अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा है कि 'जिस प्रदेश का नमक खाता हूं और जिस प्रदेश से मुझे सैलरी मिलती है,मैं उसका पक्षधर हूं।'
भाई का क्या है आरोप
डॉ. विश्वजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि प्रशांत कुमार सिंह जांच और संभावित रिकवरी से बचने के लिए इस्तीफे का नाटक कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशांत सिंह ने खुद को 40 प्रतिशत नेत्रहीन बताते हुए फर्जी नेत्र विकलांगता प्रमाणपत्र बनवाया और इसी आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की। उनके मुताबिक, प्रशांत कुमार सिंह ने ऐसी आंखों की बीमारी दिखाई है,जो 50 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति में दुनिया में कहीं भी नहीं पाई जाती। इसके साथ ही उन्होंने डेट ऑफ बर्थ में भी कथित तौर पर हेरफेर कर अधिकारियों को गुमराह किया।डॉ. विश्वजीत सिंह ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच पूरी कराने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
चल रही है जांच
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार,प्रशांत कुमार सिंह दो बार मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं हुए,जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसके बाद मामले की जांच CMO मऊ द्वारा कराई जा रही है और संबंधित दस्तावेजों व मेडिकल रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।
'मैं CM का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता'
इससे पहले अपने इस्तीफे में प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि 'सीएम योगी लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए मुख्यमंत्री हैं, उनका अपमान मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता। पिछले तीन दिन से मैं आहत था, मेरा इस्तीफा जब मंजूर हो जाएगा तो मैं अपने संसाधनों से सामाजिक कार्य में लग जाऊंगा।' अपने पद से इस्तीफा देने वाले जीएसटी डिप्टी कमिश्नर ने अपनी पत्नी को फोन किया। बात करते हुए वह फोन पर भावुक हो गए। प्रशांत कुमार का इस्तीफा अभी मंजूर नहीं हुआ है।
अलंकार अग्निहोत्री ने भी दिया था इस्तीफा
इससे पहले बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को सेवा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बताया कि प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) के 2019 बैच के अधिकारी अग्निहोत्री ने राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से अपना इस्तीफा भेजा। सूत्रों ने बताया कि अग्निहोत्री ने इस्तीफे का कारण सरकारी नीतियों, विशेषकर यूजीसी के नए नियमों से गहरी असहमति को बताया है।
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