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शंकराचार्य से रामायण के विद्वानों तक, राम मंदिर में पूजा-पाठ और धार्मिक परंपराओं की निगरानी के लिए बनी नौ सदस्यीय समिति

अयोध्या के राम मंदिर में पूजा-पाठ और धार्मिक परंपराओं के संचालन को व्यवस्थित करने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नौ सदस्यीय स्थायी धार्मिक समिति का गठन किया है।

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राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला

Photo : PTI

Ram Mandir: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में पूजा-पाठ, रीति-रिवाजों और धार्मिक मामलों की देखरेख के लिए नौ सदस्यीय एक स्थायी धार्मिक समिति बनाई है। इस समिति में देश के प्रमुख हिंदू धर्मगुरु, धर्म ग्रंथों के विद्वान और रामानंदी परंपरा के संत हैं। बुधवार को ट्रस्ट ने अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस समिति को मंजूरी दी। यह समिति रोजाना की पूजा, बड़े धार्मिक त्योहारों, वैदिक रीति-रिवाजों, पुजारियों की नियुक्ति-प्रशिक्षण और मंदिर की पारंपरिक पूजा पद्धति को बनाए रखने जैसे मामलों पर अंतिम निर्णय लेगी।

कौन-कौन है शामिल?

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि की अध्यक्षता वाली इस समिति में जगतगुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, कर्नाटक के पेजावर मठ के स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ, निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास, मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास, रामवल्लभ कुंज के महंत राजकुमार दास, राम कथा कुंज के स्वामी रामानंद दास, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण और हरिद्वार के अखंड परमधाम आश्रम के स्वामी परमानंद गिरि शामिल हैं। समिति में शामिल किए गए अयोध्या के सदस्यों में महंत मिथिलेश नंदिनी शरण को हिंदू धर्मग्रंथों का बड़ा विद्वान माना जाता है। उन्होंने ही मंदिर के उद्घाटन से पहले राम लला की प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान इस्तेमाल की गई पूजा-विधि की किताब लिखी थी। महंत राजकुमार दास ऐतिहासिक रामवल्लभ कुंज का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसके संस्थापक ने व्यापक रूप से प्रचलित रामार्चा पूजा पद्धति को व्यवस्थित किया था। महंत दिनेन्द्र दास श्री पंच रामानंदी निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ संतों में से एक हैं, जबकि महंत कमल नयन दास ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी हैं। राम कथा कुंज के प्रमुख स्वामी रामानंद दास रामायण के जाने-माने विद्वान हैं और पहले भी धार्मिक सलाहकार समितियों में काम कर चुके हैं।

प्रमुख धार्मिक नेता भी हैं शामिल

समिति में अयोध्या के बाहर के प्रमुख धार्मिक नेता भी शामिल हैं। गोविंद देव गिरि एक धार्मिक उपदेशक और आयोजक के तौर पर जाने जाते हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती उत्तराम्नाय ज्योतिर्पीठ परंपरा के प्रमुख हैं जबकि स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ कर्नाटक के पेजावर मठ के प्रमुख और जाने-माने वैष्णव विद्वान हैं। हरिद्वार के अखंड परमधाम आश्रम के स्वामी परमानंद गिरि को बड़े धार्मिक त्योहारों और समारोहों के आयोजन का मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह समिति रोजाना की पूजा, आरती और अन्य रीति-रिवाजों की देखरेख करेगी। वह राम नवमी और विवाह पंचमी जैसे बड़े सालाना त्योहारों की तारीखें और उन्हें मनाने का तरीका भी तय करेगी तथा यज्ञ, रामार्चा और वैदिक पाठ जैसे वैदिक समारोहों की योजना बनाएगी और उनकी देखरेख करेगी। समिति पुजारियों की नियुक्ति-प्रशिक्षण, आचरण, परिधान संहिता और पूजा-पाठ के तरीकों पर भी नजर रखेगी। यह मंदिर के पुजारियों के लिए एक स्थायी प्रशिक्षण संस्थान की देखरेख भी करेगी। हालांकि समिति का गठन कर दिया गया है, लेकिन इसके सदस्यों का कहना है कि काम करने के विस्तृत नियम अभी तय होने बाकी हैं। समिति के सदस्य आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने बताया, ’’समिति की घोषणा अभी-अभी हुई है। हम समिति के लिए उपयुक्त दिशानिर्देश का इंतज़ार कर रहे हैं, जिसमें इसके कार्यकाल की जानकारी भी शामिल हो।’’

धार्मिक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलती रहेंगी

समिति को एक जरूरी संस्थागत व्यवस्था बताते हुए उन्होंने कहा, "बेशक इसकी जरूरत है। मैं राम मंदिर के धार्मिक मामलों से जुड़ा रहा हूं और उस तीन सदस्यीय पैनल का हिस्सा था जिसे राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से पहले बनाया गया था।" उन्होंने उम्मीद जताई कि नई समिति का दायरा पिछली समिति से ज़्यादा बड़ा होगा। उन्होंने कहा, "पहले यह सीमित दायरे वाला तीन सदस्यीय पैनल था। अब, बड़े पैनल के साथ इसकी गतिविधियों का दायरा भी बढ़ेगा।" समिति के एक और सदस्य, रामवल्लभ कुंज के महंत राजकुमार दास ने बताया कि समिति ने अभी अपने कामकाज के विवरण पर विचार-विमर्श नहीं किया है। उन्होंने कहा, "समिति के काम के विवरण पर अभी चर्चा नहीं हुई है। इस पर जल्द ही काम शुरू होगा।" गुरुवार को महंत कमल नयन दास ने कहा कि नई समिति के तहत मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलती रहेंगी। उन्होंने कहा, "जिस व्यवस्था से मंदिर का प्रबंधन हो रहा है, वह अच्छी तरह काम करता रहेगा और उसमें और सुधार होगा। हमारी जिम्मेदारी होगी कि मंदिर की सही देखभाल हो और पूजा-पाठ एवं सभी धार्मिक गतिविधियां सुचारू रूप से चलें।" समित के सदस्य और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेन्द्र दास ने पहले बताया था कि राम मंदिर में सभी रीति-रिवाज और धार्मिक गतिविधियां सख्ती से रामानंदी परंपरा के अनुसार होनी चाहिए; यही सिद्धांत अब समिति के काम का आधार है। रामानंदी परंपरा एक वैष्णव संप्रदाय है जो भगवान राम को सर्वोच्च सत्ता मानता है और इसकी शुरुआत 14वीं सदी के संत रामानन्द से हुई थी।

रामानंदी परंपरा सबसे सही है

अयोध्या के ज्यादातर मंदिरों की तरह राम मंदिर भी इसी परंपरा का पालन करता है, जिसके तहत रोजाना पूजा, आरती, भोग और अन्य धार्मिक अनुष्ठान तय रामानंदी रीति-रिवाजों और धर्मग्रंथों के अनुसार किए जाते हैं। मंदिर प्रबंधन के सूत्रों ने बताया कि कुछ लोगों ने गैर-रामानंदी परंपराओं, खासकर रामानुजाचार्य परंपरा को अपनाने पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि रामानुजाचार्य परंपरा मुख्य रूप से दक्षिण भारत में मानी जाती है। उम्मीद है कि नई समिति यह पक्का करेगी कि मंदिर की स्थापित रामानंदी परंपराओं का एक जैसा पालन हो। मंदिर और रीति-रिवाजों पर नजर रखने वाले एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि यहां रामानंदी परंपरा सबसे सही है क्योंकि भगवान राम की पूजा राम लला यानी बच्चे के रूप में की जाती है, जबकि दक्षिण भारतीय परंपराओं में देवता को ज़्यादातर एक वयस्क और वनवास में रह रहे राजा के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा, "पूजा और रीति-रिवाजों के दोनों तरीकों में इस बात के आधार पर अंतर होता है कि भगवान राम के किस रूप की पूजा की जा रही है।" बुधवार को ट्रस्ट की बैठक के बाद इस फैसले की घोषणा करते हुए, अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन के साथ पत्रकारों को जानकारी देने वाले गोविंद देव गिरी ने कहा था कि राम मंदिर के सभी धार्मिक मामलों की देखरेख करने और रीति-रिवाजों की प्रमाणिकता और पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी कमेटी बनाई जा रही है। यह कदम ट्रस्ट की उन व्यापक कोशिशों का हिस्सा है, जिनका मकसद दान में मिले पैसे की चोरी के हालिया विवाद के बाद संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करना और साथ ही मंदिर की धार्मिक परंपराओं को बनाए रखना है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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