प्रयागराज

Mahakumbh 2025: महाकुंभ 'मेला ऐप' हुआ लाइव, परंपराओं और महत्व के बारे में जानना होगा आसान, रिसर्चर के लिए होगी लाभकारी

Mahakumbh 2025: 12 वर्षों बाद 13 जनवरी 2025 में महाकुंभ का आयोजन प्रयागराज में किया जा रहा है। इसको लेकर यूपी सरकार की तैयारी तेज हो गई है। महाकुंभ के महत्व और लोगों के बीच इसकी जिज्ञासा को देखते हुए मेला ऐप को लाइव कर दिया गया है। इसके माध्यम से आपको एक ही स्थान पर सारी जानकारी मिल जाएगी।

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महाकुंभ 2024 मेला ऐप लाइव

Photo : iStock

Mahakumbh 2025: संगम नगरी प्रयागराज में 12 वर्षों में एक बार होने वाले महाकुंभ 2025 का महा आयोजन किया जा रहा है। 13 जनवरी 2025 को महाकुंभ की शुरुआत होगी और महाशिवरात्रि के दिन यानी 26 फरवरी 2024 को अंतिम स्नान के साथ कुंभ पर्व का समापन होगा। यूपी सरकार कुंभ मेले की तैयारी में जुटी हुई। इस मेले के लिए भारी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक प्रयागराज आएंगे। मेले में शामिल होने वाले लोगों के लिए इसे आकर्षित और यादगार बनाने के लिए सरकार द्वारा रिवर फ्रंट समेत कई अन्य योजनाओं का कार्य तेजी से पूरा किए जाने पर जोर दिया जा रहा है।

देश-विदेश में सभी जगहों पर 12 साल में होने वाले महाकुंभ को समझने के लिए लोगों में जिज्ञासा देखने को मिल रही है। विभिन्न सर्च इंजन पर लोग महाकुंभ 2025 की तारीखों और इसके महत्व के बारे में जानने के लिए अलग-अलग की-वर्ड्स को सर्च कर रहे हैं। लोगों की इस जिज्ञासा को देखते हुए और उनकी इस परेशानी को दूर करने के लिए महाकुंभ 2025 को लेकर आधिकारिक तौर पर मेला ऐप को लाइव कर दिया गया है। इस ऐप में आपको मेले से संबंधित हर प्रकार की सूचना मिल जाएगी। मुख्य तौर पर ये मेला ऐप आपको महाकुंभ की परंपराओं और महत्व की समस्त जानकारी एक ही स्थान पर देगा।

महाकुंभ मेला ऐप

जानकारी के अनुसार, मेला ऐप पर लोगों को न सिर्फ महाकुंभ के विषय में विभिन्न जानकारियां मिलेंगी, बल्कि महाकुंभ और कुंभ पर लिखी गई किताबों और ब्लॉग्स के माध्यम से मेले की परंपराओं और इसके महत्व के विषय में अधिक जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसमें महाकुंभ को लेकर की गई रिपोर्ट भी सम्मिलित की गई है। इसके माध्यम से वो लोग जो महाकुंभ पर रिसर्च करना चाहते हैं, उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। तैयारियों के बीच लोग अधिक से अधिक महाकुंभ के विषय में जान सकें, इसको लेकर 'महाकुंभ मेला 2025 ऐप' को भी लाइव कर दिया गया है। लोग इसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड भी कर सकते हैं।

महाकुंभ के ब्लॉग सेक्शन में यूपी टूरिज्म की 'एक्सप्लोर प्रयागराज' को भी स्थान दिया गया है, जिसमें संगम नगरी की आध्यात्मिकता और आधुनिकता को बताने का प्रयास किया गया है। इसमें प्रयागराज का इंट्रोडक्शन देने के साथ-साथ प्रयागराज में आकर्षण के केंद्रों के साथ शहर की प्रमुख हस्तियों का जिक्र किया गया है। इसके अतिरिक्त भारतीय प्रबंध संस्थान बेंगलुरू की 'प्रयागराज महाकुंभ 2019' को भी इसमें रखा गया है, जो महाकुंभ का एकीकृत मूल्यांकन करती है। इसके अतिरिक्त पेंट माय सिटी, स्वच्छ कुंभ, प्रयागराज स्मार्ट सिटी, स्मार्ट फ्यूचर और द मैग्नीफिसेंस ऑफ कुंभ जैसे स्टडी रिपोर्ट को भी रखा गया है, जो प्रयागराज और महाकुंभ को समझने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

धार्मिक मेलो का शहर है प्रयागराज

प्रयागराज भारत के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है। इसे प्राचीन शास्त्रों में 'प्रयाग' या 'तीर्थराज' के नाम से भी सुशोभित किया गया है। इसे भारत के पवित्रतम तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। यह शहर वार्षिक माघ मेला, प्रत्येक छह वर्षों में कुंभ मेला और हर 12 वर्ष में महाकुंभ मेला के लिए भी प्रसिद्ध है। प्रयागराज में होने वाले इन सम्मेलनों को धरती पर मानवता के सबसे बड़े सामूहिक आयोजन के रूप में जाना जाता है। यूनेस्को ने कुंभ मेले को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सूचीबद्ध किया है। इस बार महाकुंभ मेला के लिए शहर में तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं।

(इनपुट - आईएएनएस)

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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