Gujarat News: भारत अब केवल मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स का उपभोक्ता नहीं, बल्कि दुनिया का 'चिप मेकर' बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। गुजरात का साणंद, जो कभी केवल ऑटोमोबाइल हब के रूप में जाना जाता था, अब ताइवान के 'शिनचू' और दक्षिण कोरिया के 'ग्योंगगी' की तर्ज पर वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनकर उभर रहा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मार्च को साणंद में केन्स सेमीकॉन (Kaynes Semicon) की अत्याधुनिक OSAT (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट) सुविधा का उद्घाटन करने जा रहे हैं।
केन्स सेमीकॉन: चिप निर्माण में नया मील का पत्थर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 31 मार्च को उद्घाटित होने वाला यह प्रोजेक्ट 3,300 करोड़ के निवेश से तैयार किया गया है। इसे केंद्रीय कैबिनेट ने 23 सितंबर 2024 को 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' के तहत मंजूरी दी थी। यह प्लांट प्रतिदिन 60 लाख चिप्स का उत्पादन करने की क्षमता रखता है, जो भारत की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ निर्यात में भी बड़ी भूमिका निभाएगा। OSAT सुविधा में सेमीकंडक्टर चिप्स को बाजार में भेजने से पहले उनकी टेस्टिंग और पैकेजिंग की जाती है। यह चिप निर्माण की वैल्यू चेन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
साणंद: ऑटो हब से चिप हब तक का सफर
साणंद की औद्योगिक तस्वीर पिछले कुछ ही वर्षों में पूरी तरह बदल गई है। माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron) और केन्स सेमीकॉन के साथ-साथ अब CG Semi भी यहां अपना प्लांट लगा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल फैक्ट्रियां लगाना नहीं, बल्कि एक पूरा इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें डिजाइन इंजीनियर से लेकर मशीन निर्माता और लॉजिस्टिक्स तक शामिल हों।
900 दिनों में 'नामुमकिन' को किया 'मुमकिन'
प्रधानमंत्री ने इससे पहले माइक्रोन प्लांट के उद्घाटन के दौरान भारत की कार्यक्षमता की सराहना करते हुए कहा था कि जहां विकसित देशों में इन प्रक्रियाओं में सालों लग जाते हैं, वहीं भारत ने जून 2023 में MoU साइन करने से लेकर फरवरी 2026 में उत्पादन शुरू करने तक का सफर मात्र 900 दिनों में पूरा किया। यह 'सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' की निर्णायक नीतियों का ही परिणाम है।
ग्लोबल वैल्यू चेन का अहम हिस्सा बना भारत
कोविड काल के दौरान शुरू हुए प्रयासों के अब परिणाम दिखने लगे हैं। 'सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम' के तहत अब तक 10 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से 4 अकेले गुजरात में हैं। प्रधानमंत्री का मानना है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में यह विकास भारत के तकनीकी भविष्य के लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होगा।
