पटना

पत्रकार की हत्या पर जब घिरे तो बोले सीएम नीतीश- बिहार में नहीं है अपराध; भड़की भाजपा

Political Uproar On Bihar Crime: बिहार में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं के चलते भाजपा नीतीश सरकार पर निशाना साध रही है। पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने मुख्यमंत्री को खरी खोटी सुनाते हुए कहा कि कानून कहीं न कहीं सरकार के हाथ से निकल चुका है। इसके जवाब में नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार में अपराध नहीं है।

Nitish Kumar Vs BJP: 'बिहार में अपराध नहीं है...' ये प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अररिया में हुई पत्रकार की हत्या के बाद दी है। भाजपा ने राज्य में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं को लेकर जब सरकार पर सवाल उठाया तो सीएम नीतीश ने कहा कि 'कहां आपराधिक घटना घट रही है, कौन कह रहा है? कोई आपराधिक घटना नहीं है, कितना कम है...'

पत्रकार की हत्या के बाद शुरू हुई जुबानी जंग

अररिया के रानीगंज के एक दैनिक अखबार के रिपोर्टर विमल कुमार यादव की आज सुबह बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। बदमाशों ने सुबह सुबह उनके घर का दरवाजा खटखटाया और आवाज देकर बाहर बुलाया और जैसे ही घर का दरवाजा खुला, बदमाशों ने गोलियों से उसे भून डाला। वारदात रानीगंज थाना क्षेत्र बेलसरा के हीरो शोरूम के पीछे स्थित घर की है।

बिहार में अपराध बेलगाम vs सब ठीक है!

अररिया में पत्रकार की हत्या पर पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने बिहार सरकार पर निशाना साधा है। तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि 'लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर एक हमला हुआ है और हम इसकी निंदा करते हैं। जब पत्रकार की जान इस तरह से जाएगी। पुलिस के अधिकारी नंद किशोर यादव की हत्या पशु तस्करों ने कर दी। कानून कहीं न कहीं सरकार के हाथ से निकल चुका है। लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं। जो अपराधी हैं, उनकी तुरंत गिरफ्तारी हो इसकी मांग करते हैं। पत्रकारों को विशेष रूप से सुरक्षा प्रदान की जाए।'

नीतीश कुमार का दावा- बिहार में अपराध नहीं

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'कहां आपराधिक घटना घट रही है, कौन कह रहा है? आप जरा देखिए तो, क्या बात है? कोई आपराधिक घटना नहीं है, कितना कम है... जरा फिगर तो देखिए। सारा फिगर जब प्रकाशित होता है, तब देखिए। बहुत कम है, बिना मतलब का वो (भाजपा नेता) ये सब बुनते रहते हैं। ताकि मीडिया पर तो कब्जा कर लिया है, एकतरफा आना है तो वही सब आता रहेगा। हम लोग जो बताएंगे तो आप लोग चलाएंगे ही नहीं।'

पत्रकार को किसने और क्यों मार डाला?

दो साल पहले बदमाशों ने इसी तरह पत्रकार के सरपंच भाई की भी हत्या कर दी थी। जिसमें वह मुख्य गवाह था और ऐसी आशंका जताई जा रही है कि मुख्य गवाह होने के कारण बदमाशों ने उनकी हत्या कर दी। पत्रकार को बदमाशों ने कई बार गवाही नहीं देने से रोका था, बावजूद इसके कोर्ट में चल रहे ट्रायल के दौरान अपने भाई के हत्यारे के खिलाफ गवाही दी थी। फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए अररिया सदर अस्पताल लाया गया है। घटना के बाद से परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।

अपराधियों ने थानाध्यक्ष के सिर में मारी गोली

इसी हफ्ते समस्तीपुर के दलसिंहसराय थाना क्षेत्र में पशु तस्करों ने मोहनपुर ओपी थानाध्यक्ष नंद किशोर यादव को अपराधियों ने गोली मार दी थी। गंभीर स्थिति में उन्हें दलसिंहसराय अनुमंडल अस्पताल लाया गया जहां उनकी मौत हो गई। वहीं बीते जुलाई के महीने में बेखौफ अपराधियों ने पटना पुलिस को खुली चुनौती देते हुए पटना नगर निगम के वार्ड पार्षद सुचित्रा सिन्हा के पति पूर्व मुखिया नीलेश यादव को दिनदहाड़े गोली मार दी थी।

अब पत्रकार की हत्या के बाद कानून व्यवस्था और सरकार दोनों ही सवालों के घेरे में हैं। हालांकि नीतीश कुमार का मानना है कि बिहार में अपराधिक घटनाएं नहीं हो रही हैं। दिनदहाड़े हत्या, गोलीबारी जैसी घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं इसके बावजूद सरकार अपना पल्ला झाड़ रही है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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