पटना: चर्चित आईपीएस विकास वैभव ने सोमवार को नमस्ते बिहार कार्यक्रम आयोजित किया। विकास वैभव ने अपने संबोधन की शुरुआत राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर एवं गंगा को नमन करते हुए की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह ना तो राजनीतिक कार्यक्रम है और ना ही यह कोई धार्मिक मंच है । इस मंत्र से सिर्फ लोगों को पुराने बिहार की याद दिलाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने, कहा कि बिहार के इतिहास पर गौर किया जाए तो जब बिहार के पास संसाधन नहीं थे, संसाधन की कमी थी। उस समय बिहार में कई महापुरुषों ने जन्म लिया, जिन्होंने अपने-अपने योग्यता से पूरे विश्व में अपना परचम लहराया।
बिहारी कहने पर आती है शर्म
आईपीएस विकास वैभव ने कहा यही वजह थी कि बिहार को ज्ञान की भूमि कहा जाता था और विक्रमशिला इसका जीता जागता उदाहरण है। जिस वक्त बिहार में संसाधन नहीं थे, उस वक्त हमारी सीमा रेखा अफगानिस्तान तक होती थी। यही वजह है कि एक समय ज्ञान के लिए पूरे विश्व से लोग बिहार आते थे और आज बिहार के लोग विभिन्न जगहों पर शिक्षा ग्रहण करने के लिए जा रहे हैं। उन्होंने खुले मंच से कहा कि एक समय था, जब बिहार का नाम आते ही लोगों के मन में सम्मान भर जाता था, लेकिन आज वही समय है जब बिहार का नाम कहने में बिहारियों को शर्म आती है।
