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पटना के अटल पार्क को लेकर विवाद: मंत्री तेज प्रताप ने कार्यक्रम से बनाई दूरी, लेकिन बोले- 'कोकोनट पार्क' है उसका नाम

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 21, 2023, 04:32 PM IST

Patna Atal Park: अटल पार्क के नाम बदलने को लेकर शुरू हुए विवार के बाद मंत्री तेज प्रताप यादव ने बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से यह अफवाह फैलाई जा रही है कि पार्क का नाम बदला जा रहा है। उन्होंने कहा, सरकारी कागजों में उस पार्क का नाम अटल पार्क नहीं, बल्कि कोकोनट पार्क है।

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बिहार सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव

Photo : BCCL

Patna Atal Park: बिहार की राजधानी पटना में अटल पार्क का नाम बदलने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पहले बिहार सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्री तेज प्रताप यादव ने इसका नाम बदलकर कोकोनट पार्क करने का ऐलान कर दिया। भाजपा ने इसका विरोध किया, जिसके बाद वे बैकफुट पर नजर आए। आज पार्क में होने वाले कार्यक्रम से भी उन्होंने दूरी बना ली। हालांकि, इतना जरूर कहा कि पार्क का नाम नहीं बदला गया है, उसका नाम पहले से ही कोकोनट पार्क था।

बता दें कि पटना में आज करीब आधा दर्जन पार्कों का लोकार्पण होना था। इसमें अटल बिहारी वाजपेयी पार्क भी था, जिसका नाम कोकोनट पार्क किया जाना था। मंत्री तेज प्रताप यादव को इस कार्यक्रम में शामिल होना था। हालांकि, भाजपा के विरोध के बाद पार्क का नाम बदलने का कार्यक्रम रोक दिया गया। इतना ही नहीं इस कार्यक्रम में सरकार की ओर से कोई नुमाइंदा भी नहीं पहुंचा।

भाजपा फैला रही अफवाह- तेज प्रताप

अटल पार्क के नाम बदलने को लेकर शुरू हुए विवार के बाद मंत्री तेज प्रताप यादव ने बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से यह अफवाह फैलाई जा रही है कि पार्क का नाम बदला जा रहा है। उन्होंने कहा, सरकारी कागजों में उस पार्क का नाम अटल पार्क नहीं, बल्कि कोकोनट पार्क है। उस पार्क का कोई नाम नहीं बदला जा रहा है। हालांकि, पार्क में होने वाले कार्यक्रम में शामिल न होने के सवाल पर उन्होंने चुप्पी साध ली।

भाजपा बोली- यह पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान

पार्क का नाम बदले जाने को लेकर भाजपा ने बिहार सरकार पर हमला बोला है। केंद्रीय गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस फैसले का विरोध जताते हुए कहा कि अटल पार्क का नाम बदलकर कोकोनट पार्क रखना दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है। यह पूर्व प्रधानमंत्री और भारतरत्न का अपमान है। उन्होंने आगे कहा, जुगनुओं के टिमटिमाने से सूरज का प्रकाश नहीं फैल जाता।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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