Bihar Chunav 2025: विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी बुधवार को दिन भर चर्चा में रहे और उसका कारण था, मुकेश सहनी की दिलीप जायसवाल से होने वाली मुलाकात। दरअसल आज सुबह से ही मुकेश सहनी की बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से मुलाकात और NDA में शामिल होने की चर्चा हो रही थी। इन सारी सुगबुगाहटों पर शांत करते हुए सहनी ने साफ कर दिया है कि वो महागठबंधन के साथ रहेंगे। इसके अलावा आज 1995 बैच के IPS अधिकारी मो. नुरुल होदा भी अपनी IPS की नौकरी छोड़कर VIP में शामिल हो गए।
NDA में नहीं जा रहे सहनी
मंगलवार को दिलीप कुमार जायसवाल और मुकेश सहनी की मुलाकात हुई थी। जिसके बाद से सियासी गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया था। फिलहाल ये कयास दबा दिए गए हैं, मुकेश सहनी ने VIP के NDA में शामिल होने की अटकलों को खारिज कर दिया है। एक बयान में मुकेश सहनी ने कहा कि मैं दिलीप जायसवाल जी से 200 कदम पीछे चलता हूं। वो पार्टी को तोड़ने में आगे रहने वाले हैं।
महागठबंधन की मीटिंग में होंगे शामिल
पटना में आयोजित एक मिलन समारोह में बोलते हुए मुकेश सहनी ने NDA में जाने से इनकार कर दिया और साथ ही ये भी कहा कि वो महागठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा, “मेरे विधायक तोड़ लिए गए, फिर भी मैं झुका नहीं। भाजपा की चाल अब सब समझ चुके हैं। अब मैं NDA में कभी नहीं जाऊंगा।” 17 अप्रैल को होने वाली महागठबंधन की अहम बैठक में सहनी शामिल होंगे। मीटिंग में सीट शेयरिंग को लेकर निर्णय होना है।
"60 नहीं 243 सीटों के हैं उम्मीदवार"
मुकेश सहनी ने खुद को महागठबंधन के साथ बताया और कहा कि INDIA गठबंधन की 2024 में मैंने और तेजस्वी जी ने कमान संभाली। नेतृत्व को लेकर बिहार गठबंधन में सीट की कोई मारा मारी नहीं है। राजद के लिए तेजस्वी सर्वमान्य नेता हैं। कांग्रेस में भी कई लोग हैं जिनको परेशानी हो सकती है। हमलोग राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ेंगे, हमारे पास 60 नहीं 243 सीटों के लिए उम्मीदवार हैं।
क्यों खास हैं मुकेश सहनी
जानकारी के लिए बता दें कि 2020 में सहनी NDA के साथ चुनाव लड़े थे, लेकिन बाद में महागठबंधन के साथ आ गए। मुकेश सहनी बिहार की राजनीति में बड़ा नाम हैं इसलिए इनसे जुड़ी खबरों पर काफी चर्चा होती है। सहनी मल्लाह जाति से आते हैं, जो बिहार में अति पिछड़ा समाज का हिस्सा है। निषाद समाज की उपजातियों की आबादी एक अनुमान के मुताबिक बिहार में लगभग आठ से नौ प्रतिशत है। जो कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। इस तबके के सबसे बड़े नेता के तौर पर मुकेश सहनी जाने जाते हैं, इसीलिए बिहार की राजनीति में इनका नाम बड़ा है।
