पटना

कक्षा 8 के छात्र ने 6 साल के जूनियर की ईंट से कुचलकर की हत्या, पुलिस ने हिरासत में लिया

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 21, 2023, 03:51 PM IST

Bihar Crime News: गोपालगंज के फुलवरिया थाना क्षेत्र के मजीरा कला गांव स्थित आवासीय विद्यालय न्यू ज्ञान लोक कंपीटिशन स्कूल के हॉस्टल की छत पर छह साल के आर्यन कुमार सिंह का शव मिला था। उसके मुंह व नाक पर खून लगा हुआ था और गले पर भी निशान थे।

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आरोपी छात्र को पुलिस ने हिरासत में लिया

Photo : iStock

Bihar Crime News: बिहार के गोपालगंज के एक स्कूल में छह साल के छात्र की हत्या मामले में चौंका देने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस ने हत्या के आरोप में उसी स्कूल के कक्षा 8 के छात्र को हिरासत में लिया है। पुलिस ने बताया आरोपी छात्र ने हॉस्टल की छत पर नर्सरी में पढ़ने वाले अपने जूनियर की बेरहमी से हत्या कर दी। उसने पहले ईंट से उसके चेहरे को कुचला और बाद में कपड़े से उसका गला घोंट दिया।

पुलिस ने बताया, सीसीटीवी फुटेज में आरोपी छात्र अपने जूनियर के पीछे जाते हुए दिखाई दे रहा है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने हत्या की बात भी स्वीकार कर ली है। पुलिस ने घटनास्थल से खून से सनी ईंट और कपड़ा भी बरामद किया है।

गुस्से में आकर की थी हत्या

पुलिस ने बताया, गोपालगंज के फुलवरिया थाना क्षेत्र के मजीरा कला गांव स्थित आवासीय विद्यालय न्यू ज्ञान लोक कंपीटिशन स्कूल के हॉस्टल की छत पर छह साल के आर्यन कुमार सिंह का शव मिला था। उसके मुंह व नाक पर खून लगा हुआ था और गले पर भी निशान थे, जिस कारण पुलिस को हत्या का शक हुआ। गोपालगंज के एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया की घटना के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और डॉग स्क्वॉड को मौके पर बुलाया गया। जांच के दौरान पूरा मामला सामने आया। पुलिस ने बताया आरोपी ने स्वीकार किया है कि उसने गुस्से में आकर छात्र की हत्या कर दी थी।

कुछ दिन पहले ही हुआ था नर्सरी में एडमिशन

मृतक छात्र आर्यन कुमार सिंह के परिवारीजनों ने बताया कि उसके पिता सऊदी में रहते हैं। आर्यन के मामा पंकज ने बताया कि स्कूल में उसका एडमिशन कुछ दिन पहले ही कराया गया था। शनिवार को स्कूल से सुबह 8 बजे फोन आया कि आपके बच्चे की तबीयत खराब है। जब हम लोग स्कूल पहुंचे तो बच्चा जमीन पर पड़ा हुआ था, उसके मुंह पर खून लगा हुआ था और मौत हो चुकी थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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