पंचकूला के एक सरकारी स्कूल की एक कक्षा में आठ वर्षीय लड़के के कथित हमले में घायल हुई छह वर्षीय बच्ची को बुधवार को चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) से छुट्टी दे दी गई। जीआईएमईआर ने कहा कि बच्ची का इलाज पूरी सावधानी और संवेदनशीलता के साथ किया गया तथा संस्थान ने उपचार और निजी कमरे की सुविधा सहित सभी खर्च वहन किए, ताकि इस कठिन समय में परिवार पर कोई आर्थिक बोझ न पड़े।
पीजीआईएमईआर के निदेशक विवेक लाल ने अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान बच्ची से मुलाकात कर उसके स्वास्थ्य का हाल जाना और उसे छुट्टी दिए जाने पर संतोष जताया।
प्रमुख प्रोफेसर जे.के. महाजन के मार्गदर्शन में सर्जरी
बच्ची के इलाज में बाल चिकित्सा सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर जे.के. महाजन के मार्गदर्शन में एक समन्वित प्रयास किया गया, जिसमें ट्रॉमा सेंटर ने उसकी देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. रमन शर्मा ने उनके इलाज से जुड़े ट्रॉमा संबंधी पहलुओं का समन्वय किया, जबकि मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रोफेसर अशोक कुमार ने अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान जरूरी संस्थागत सहयोग और समन्वय सुनिश्चित किया। हमें खुशी है कि उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और हम उम्मीद करते हैं कि वह जल्द ही अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट आएंगी।
हरियाणा सरकार ने जांच के दिए आदेश
हरियाणा सरकार ने शनिवार को 28 अक्टूबर को हुई मारपीट की घटना की जांच के आदेश दिए, जबकि पुलिस ने कथित लापरवाही के आरोप में स्कूल प्रशासन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एचएससीपीसीआर) ने भी इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया।
पंचकूला की पुलिस उपायुक्त अदिति सिंह के अनुसार, पुलिस की टीम विद्यार्थियों को समझा रही हैं कि सहपाठियों को मारना, अपशब्दों का इस्तेमाल करना, चिढ़ाना, धमकाना या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना अस्वीकार्य व्यवहार है।
विद्यार्थियों को शारीरिक बल का इस्तेमाल करने के बजाय बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने की सलाह दी जा रही है। उन्हें यह भी कहा जा रहा है कि किसी समस्या का सामना करने या किसी विवाद में उलझने पर वे अपने शिक्षकों या माता-पिता से संपर्क करें।
