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Noida News: 158 करोड़ में बना अत्याधुनिक बस टर्मिनल, 4 साल में बे 'Bus' हुआ बदहाल

Noida News: नोएडा के सेक्टर-82 में 158 करोड़ रुपये से बना आठ मंजिला बस टर्मिनल सिर्फ 4 साल में ही बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। संचालन, हैंडओवर और रखरखाव की चुनौतियों के बीच यात्रियों को बस संचालन का भी इंतजार है।

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नोएडा के सेक्टर 82 में बदहाल बस टर्मिनल

Noida News: नोएडा में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तमाम वादे किए जाते हैं। योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन जनता तक उन योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता है। इसका जीता-जागता उदाहरण है नोएडा के सेक्टर 82 में बनाया गया आधुनिक सिटी बस टर्मिनल। कहां तो उम्मीद थी कि यह आधुनिक बस टर्मिनल शहर की परिवहन व्यवस्था को बूस्ट देगा और कहां यह खुद ही बदहाली की कहानी बयां कर रहा है।

सेक्टर 82 के इस 8 मंजिला बस टर्मिनल को 158 करोड़ की लागत से बनाया गया था, लेकिन उद्घाटन के 4 साल बाद भी इसका इस्तेमाल शुरू नहीं हो पाया है। यहां महंगे फैब्रिक वाले शेड फट चुके हैं और स्टील स्ट्रक्चर पर जंग लगने लगा है। बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी को लेकर प्राधिकरण और परिवहन विभाग के बीच बनी स्थिति का खामियाजा इस परियोजना को भुगतना पड़ रहा है।

लगभग 30 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में बने इस टर्मिनल में एक समय पर लगभग 40 बसें खड़ी करने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य नोएडा से स्थानीय और दूसरे शहरों के लिए बस सेवाओं को बेहतर बनाना था। लेकिन संचालन की व्यवस्था और यात्रियों की पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण यह महत्वाकांक्षी परियोजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी।

2013 में मंजूरी, 2022 में हुआ उद्घाटन

सेक्टर-82 बस टर्मिनल परियोजना को साल 2013 में सपा सरकार के दौरान मंजूरी मिली थी और निर्माण कार्य जनवरी 2015 में शुरू हुआ। कई बाधाओं और देरी के बाद यह परियोजना साल 2022 में उद्घाटन तक पहुंची। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि यहां से बस सेवाओं का विस्तार होगा और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। हालांकि, उद्घाटन के बाद भी टर्मिनल पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो सका। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती दौर में यहां से सीमित संख्या में बसें ही चल रही थीं।

हैंडओवर और संचालन का पेच

नोएडा प्राधिकरण ने टर्मिनल को संचालित करने के लिए परिवहन विभाग को हैंडओवर लेने के संबंध में पत्र लिखा था। लेकिन तकनीकी खामियों और संचालन से जुड़ी समस्याओं के चलते यह हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसके परिणामस्वरूप बस टर्मिनल का इस्तेमाल सीमित रहा और इमारत की देखरेख भी चुनौती बन गई।

बस टर्मिनल की शेड भी खराब हो चुकी है

बस टर्मिनल की शेड भी खराब हो चुकी है

रखरखाव और बिजली बिल का आर्थिक बोझ

टर्मिनल के नियमित रखरखाव और बिजली बिल पर होने वाला खर्च नोएडा प्राधिकरण पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है। दूसरी ओर, इमारत के हिस्सों में टूट-फूट और शेड की खराब हालत परियोजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर रही है।

कनेक्टिविटी भी बड़ी चुनौती

घनी आबादी के बीच स्थित होने के बावजूद टर्मिनल की कनेक्टिविटी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। यदि यहां पर्याप्त बस सेवाएं, बेहतर पहुंच और व्यावसायिक गतिविधियां विकसित नहीं होतीं, तो इतनी बड़ी परियोजना का पूरा लाभ शहरवासियों तक पहुंचना मुश्किल होगा।

अब सवाल है कि करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए इस टर्मिनल को पूरी क्षमता से चलाने के लिए प्राधिकरण और परिवहन विभाग कब ठोस कदम उठाते हैं। नोएडा के यात्रियों को इसका जवाब और बेहतर परिवहन सुविधा, दोनों का इंतजार है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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