दिल्ली : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को 1996 के एक मामले में गिरफ्तार किया है। यह मामला जम्मू-कश्मीर में भीड़ हिंसा से जुड़ा है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने एनआईए को 3 दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर दी। यह मामला 17 जुलाई 1996 को श्रीनगर के शेरगड़ी थाने में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। एनआईए ने इस केस को 1 अप्रैल 2026 को दोबारा दर्ज किया था। अदालत ने आदेश दिया है कि आरोपी को 20 अप्रैल तक जम्मू स्थित एनआईए की विशेष अदालत में पेश किया जाए।
क्या था मामला?
जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला उस समय का है जब मारे गए आतंकियों के जनाजे के दौरान भीड़ ने नारेबाजी की और स्थिति हिंसक हो गई। आरोप है कि भीड़ ने पथराव किया, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और कुछ आतंकियों ने पुलिस पर फायरिंग भी की, जिससे सुरक्षाकर्मी घायल हुए।
एनआईए ने अदालत में कहा कि मामले की जांच शुरुआती चरण में है और शब्बीर शाह से पूछताछ जरूरी है, ताकि बड़ी साजिश और अन्य आरोपियों का पता लगाया जा सके। वहीं, शाह के वकीलों ने ट्रांजिट रिमांड का विरोध करते हुए इसे “डबल जियोपर्डी” (एक ही मामले में बार-बार जांच) बताया। उनका कहना है कि 1996 की घटना की पहले भी जांच हो चुकी है, इसलिए दोबारा जांच करना संविधान के खिलाफ है।
घटना के दौरान क्या हुआ था?
- जनाजे के दौरान भीड़ ने भारत विरोधी और भड़काऊ नारेबाजी की।
- हालात धीरे-धीरे हिंसक हो गए।
- भीड़ ने पथराव किया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
- आरोप है कि कुछ आतंकियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों पर फायरिंग भी की।
- इस हिंसा में सुरक्षाकर्मी घायल हुए और कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई।
गौरतलब है कि शब्बीर शाह को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से एक अन्य एनआईए मामले में जमानत मिली थी, और वह पहले भी कई मामलों में लंबे समय तक हिरासत में रह चुके हैं।
