मुंबई

स्कूल की सजा बनी मौत की वजह, 100 उठक-बैठक ने ली बच्ची की जान, महिला टीचर गिरफ्तार

महाराष्ट्र में पालघर के वसई में स्कूल पहुंचने में 10 मिनट की देरी के कारण 100 उठक-बैठक की सजा ने एक 13 साल की बच्ची की जान ले ली। इस मामले की जांच कर रही पुलिस ने सजा सुनाने वाली टीचर को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

Arrested

वसई में 100 उठक-बैठक के मामले में छात्रा की मौत के मामले में महिला टीचर गिरफ्तार

Palghar News: महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई में, छठी कक्षा की छात्रा काजल की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उस महिला टीचर को गिरफ्तार कर लिया है जिसने उसे 100 उठक-बैठक की अमानवीय सजा दी थी। इस दर्दनाक घटना ने शिक्षा प्रणाली और शिक्षकों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस घटना के बाद, गट शिक्षा अधिकारी (Block Education Officer) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए थे, और इससे संबंधित सभी जानकारी उच्च अधिकारियों को भी भेज दी गई है।

जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस खुलासे के अनुसार, वसई में स्थित यह स्कूल केवल 8वीं कक्षा तक ही मान्यता प्राप्त था, लेकिन यहां 10वीं कक्षा तक संचालित की जा रही थी। पुलिस ने महिला टीचर की गिरफ्तारी के बाद अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसमें स्कूल के अनधिकृत संचालन से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला

बता दें कि 14 नवंबर चिल्ड्रंस डे के अवसर पर स्कूल में मिली एक क्रूर सजा के कारण 13 वर्षीय बच्ची ने मुंबई के अस्पताल में दम तोड़ दिया। बच्ची की मौत के बाद स्कूल में महिला टीचर द्वारा दी गई अमानवीय सजा के मामले ने तुल पकड़ ली और स्थानीय लोगों और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन को भड़का और दिया, जिसके बाद पुलिस को इस संबंध में मामला दर्ज करना पड़ा।

इस घटना की जांच कर रही अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने मंगलवार रात को संबंधित शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अलावा शिक्षा विभाग और वसई-विरार नगर निगम ने भी मामले में अपनी ओर से जांच शुरू कर दी है।

10 मिनट की देरी पर दी अमानवीय सजा

रोज की तरह 8 नवंबर को काजल स्कूल गई थी, लेकिन वहां पहुंचने में उसे 10 मिनट की देरी हो गई। किसी को नहीं पता था की स्कूल पहुंचने में 10 मिनट की देरी काजल की जान पर बन आएगी। काजल के साथ कुछ अन्य छात्र भी स्कूल देरी से पहुंचे थे, जिसके बाद स्कूल की एक महिला टीचर ने उन्हें 100 उठक-बैठक लगाने की सजा सुनाई। सभी बच्चों ने एक साथ उठक-बैठक शुरू की लेकिन कुछ देर बाद वह सभी रुक गए, लेकिन डर के कारण काजल ने पूरी 100 उठक-बैठक की। इस सजा के बाद अगले दिन काजल की तबियत बिगड़ने लगी और उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए मुंबई रेफर किया गया। डॉक्टरों की तमाम कोशिश के बाद भी काजल की जान नहीं बच पाई।

6 दिन तक चला बच्ची का इलाज

काजल की मौत के बाद उसकी मां ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की मौत महिला टीचर द्वारा दी गई एक "अमानवीय सजा" के कारण हुई है, टीचर ने उसे पीठ पर स्कूल बैग रखकर उठक बैठक करने को मजबूर किया था। इस मामले पर एक अधिकारी ने बताया कि छात्रा को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं और वह सजा बर्दाश्त नहीं कर सकी जिससे उसकी तबीयत खराब हो गई और उसे मुंबई के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां 6 दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई।

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varsha kushwaha
varsha kushwaha Author

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग... और देखें

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