मुंबई

'सांप ने काट लिया कहकर जोर से चिल्लाने लगा शख्स', फिर कैब रुकवाकर समंदर में लगा दी छलांग; जानें पूरा मामला

मुंबई के एक कारोबारी ने बुधवार (17 सितंबर) को लगभग 1 बजे बांद्रा-वर्ली समुद्री लिंक से कूदकर अपनी जान दे दी। रिपोर्ट के मुताबिक जब वह कैब में घर लौट रहा था अचानक उसने ड्राइवर से कार रोकने के लिए कहा और कैब से उतरकर समुंद्र में कूद गया। जानिए क्या था पूरा मामला।

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प्रतीकाात्मक तस्वीर (PHOTO -PTI)

मुंबई: मुंबई के एक कारोबारी ने बुधवार (17 सितंबर) को लगभग 1 बजे बांद्रा-वर्ली समुद्री लिंक से कूदकर अपनी जान दे दी। रिपोर्ट के मुताबिक जब वह कैब में घर लौट रहा था अचानक उसने ड्राइवर से कार रोकने के लिए कहा। इस दौरान वह चिल्ला रहा था कि उसे सांप ने काट लिया है। इसी घबराहत के बीच वह कैब से बाहर भागा और समुद्री लिंक से नीचे कूद गया और इस तरह शख्स की दुखद मौत हो गई।

47 वर्षीय अमित चोपड़ा अंधेरी (पश्चिम) के निवासी थे। उनका शव बाद में जुहू समुद्र तट पर सांताक्रूज पुलिस क्षेत्र में बरामद किया गया। बांद्रा पुलिस के मुताबिक चोपड़ा ने यह कदम क्यों उठाया, इस पर अभी तक कुछ भी साफ नहीं है। गुरुवार सुबह लगभग 9 बजे मछुआरों को उनका शव मिला और और उन्होंने पुलिस को सूचित किया। इस घटना के बाद अमित चोपड़ा का परिवार सदमे में हैं।

नहीं मिला कोई खुदकुशी का नोट

बांद्रा पुलिस अधिकारी के मुताबिक आत्महत्या का कोई नोट नहीं मिला है। उन्होंने मंगलवार रात 9 बजे अपने अंधेरी निवास से कैब बुक की और समुद्री लिंक पर पहुंचते ही जोर जोर से चिल्लाने लगे कि उन्हें सांप ने काट लिया है। कैब ड्राइवर ने डरकर गाड़ी रोक दी। अमित चोपड़ा गाड़ी से निकलकर समुद्र में कूद गए।

कैब ड्राइवर ने पुलिस को फोन कर दी जानकारी

पुलिस के मुताबिक कैब ड्राइवर ने पुलिस कंट्रोल रूम से संपर्क किया और घटना की जानकारी दी। चोपड़ा ने कैब में अपना स्लिंग बैग और मोबाइल फोन छोड़ दिया था जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है। बैग में कुछ दस्तावेज और उनका पहचान पत्र था जिससे पुलिस को उनके परिवार से संपर्क करने में मदद मिली। पुलिस ने कहा कि फोन को फोरेंसिक प्रयोगशाला में भेजा जाएगा ताकि मामले की जांच के लिए सुराग मिले।

चोपड़ा के परिवार ने क्या कहा

अमित चोपड़ा की पत्नी ने अपने बयान में कहा है कि वह रात को घर से निकलते थे और कुछ समय बाद लौटते थे। हालांकि, इस बार वह वापस नहीं आए और उनका फोन बंद था। जब वह नहीं लौटे तो उन्होंने लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक चोपड़ा के पीछे उनकी पत्नी और दो बेटियाँ हैं। परिवार के बयान के हवाले से पुलिस ने कहा है कि उनके पास कोई कर्ज नहीं था और उन्हें नहीं पता था कि अमित चोपड़ा अवसाद से पीड़ित थे।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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