मेरठ का पहला मेट्रो कॉरिडोर अब पूरी तरह से बनकर तैयार है। जल्द ही इस कॉरिडोर को आम जनता के लिए खोले जाने की उम्मीद भी है। यह कॉरिडोर भूड़बराल (मेरठ साउथ) से मोदीपुरम को जोड़ेगा। मेरठ मेट्रो का दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, उसे अभी रद्द नहीं किया गया है, लेकिन उस पर काम भी कुछ नहीं हो पाया है। आने वाले वर्षों में इसके काम आगे बढ़ने की संभावना हो सकती है।
सीएम ग्रिड योजना के तहत गढ़ रोड की चौड़ाई बढ़ाई जा रही है। यहां नया डिवाइडर और कल्वर्ट बनाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इस डिवाइडर को इतना चौड़ा डिजाइन किया गया है कि भविष्य में इसमें मेट्रो के पिलर खड़े किए जा सकें। वहीं, कल्वर्ट में मेट्रो से संबंधित केबल डालने की जगह भी छोड़ी जा रही है।
कई साल पहले, आरआईटीईएस लिमिटेड ने मेरठ में दो मेट्रो कॉरिडोर के लिए डीपीआर तैयार की थी। इसके तहत पहला कॉरिडोर पर्तापुर से पल्लवपुरम फेज-1 तक बेगमपुल के रास्ते प्रस्तावित था। दूसरा कॉरिडोर श्रद्धापुरम फेज-2 से होकर हापुड़ अड्डा चौराहा होते हुए गोकुलपुर गांव तक बनाया जाना था।
देश का पहला रीजनल रैपिड रेल कॉरिडोर (नमो भारत) मेरठ के पहले मेट्रो कॉरिडोर के साथ जोड़ा गया है। इसे नमो भारत रैपिड रेल के साथ इंटीग्रेट किया गया है। जहां रैपिड रेल मेरठ से दिल्ली तक जाएगी और इस रूट पर नमो भारत रैपिड रेल अभी चालू है। वहीं मेरठ मेट्रो सिर्फ शहर के भीतर, भूड़बराल तक सीमित रहेगी।
दूसरे कॉरिडोर को लेकर अभी तक कोई नया विकास कार्य शुरू नहीं हुआ है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि आने वाले वर्षों में इस पर काम की शुरुआत की जाएगी। हाल ही में मेरठ के सांसद अरुण गोविल ने मुख्यमंत्री के सामने दूसरे कॉरिडोर की मांग रखी और इसके साथ ही फुटबॉल चौक से बागपत रोड फ्लाईओवर तक एक तीसरी लाइन प्रस्तावित की।
अब दूसरे कॉरिडोर के लिए संशोधित डीपीआर तैयार करनी होगी। पहले का प्लान श्रद्धापुरम से गोकुलपुर तक था, लेकिन अब इसकी दिशा बदल दी गई है। नया प्रस्ताव बेगमपुल से गोकुलपुर या उससे आगे तक का है, जिसमें बेगमपुल को कनेक्टिविटी देना सुनिश्चित किया जाएगा।
मेरठ के लोगों के लिए यह परियोजना बेहद अहम है, क्योंकि इससे न सिर्फ शहर के भीतर परिवहन सुगम होगा, बल्कि आने वाले समय में रैपिड रेल और मेट्रो का नेटवर्क मिलकर एक आधुनिक यातायात व्यवस्था खड़ी करेगा।
