लखनऊ

Ambedkar Nagar : ACMO की मौत के 10 साल बाद सरकारी आवास से 22 लाख रुपए बरामद

यूपी के अंबेडकरनगर में एक पूर्व अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (ACMO)की मौत के 10 साल बाद उनके सरकारी आवास से 22 लाख रुपए से ज्यादा की रकम बरामद किया गया है।

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10 साल से बंद पड़े सरकारी आवास से मिले 22 लाख रुपये

नई दिल्ली: यूपी के अंबेडकरनगर में एक पूर्व अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (ACMO)की मौत के 10 साल बाद उनके सरकारी आवास से 22 लाख रुपए से ज्यादा की रकम बरामद किया गया है। गौर हो कि पूर्व अपर मुख्य चिकित्साधिकारी की मौत 29 जनवरी 2014 को हुई थी ।

10 साल से बंद पड़े इस सरकारी आवास से 22 लाख से अधिक की राशि बरामद की गई है जिसमें 500 और 1000 के नोट शामिल है। यह आवास

पूर्व अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (ACMO) डॉ. ब्रह्मनारायण तिवारी का था । इस सरकारी आवास को 10 साल तक नहीं खोला गया था। जब मरम्मत के लिए खोला गया तो बिस्तर के नीचे पुराने नोटों की गड्डियां मिलीं।

10 साल बाद सीएमओ ने कमेटी बनाकर ताला खुलवाया जिसके बाद ये रकम बरामद की गई। सफाई के दौरान अलमारी से बड़ी मात्रा में इन बरामद नोंटो को ट्रेजरी में जमा करवाया जाएगा।

तिवारी के आवास में रखे सामान के बंटवारे को लेकर परिवार के लोगों में विवाद के बाद पुलिस ने ताला लगवा दिया था। पिछले दिनों जब मरम्मत की प्रक्रिया शुरू हुई तो सीएमओ ने आवास पर विवाद या मुकदमे की सूचना पुलिस से मांगी थी।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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