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डेढ़ साल से घर में 'कैद' थे डॉक्टर, न कपड़े बदले न ढंग का खाना मिला; पड़ोसियों ने बुलाई रेस्क्यू टीम

हरियाणा के करनाल में रेस्क्यू टीम को एक बुजुर्ग को अपने ही घर से रेस्क्यू करना पड़ा। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले डेढ़ साल से उनके विदेश में बसे बच्चों ने उनकी सुध नहीं ली थी। यह घटना केवल एक डॉक्टर की नहीं, बल्कि उन तमाम बुजुर्गों की भी कहानी है जो अपनों के होते हुए भी बेसहारा हैं।

Karnal Doctor Viral Video: हरियाणा के करनाल से सामने आई यह हृदयविदारक घटना समाज में दिन ब दिन हो रहे खोखलेपन की एक ऐसी तस्वीर पेश करती है, जो किसी का भी दिल पिघला दे। एक ओर जहां हम तरक्की की बातें करते हैं, वहीं दूसरी ओर अपनों के बीच ही उपेक्षा की ऐसी खाई बन चुकी है कि एक बुजुर्ग डॉक्टर को उनके ही घर में 'तिल-तिल' मरते छोड़ दिया गया।

डॉक्टर पिता और गुमनाम अकेलापन

करनाल के एक पॉश इलाके में रहने वाले एक बुजुर्ग डॉक्टर पिछले डेढ़ साल से जिस नर्क में रह रहे थे, उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। जब रेस्क्यू टीम उनके घर पहुंची, तो वहां का नजारा देख दंग रह गई। जिस घर को उन्होंने अपने खून-पसीने से सींचा था, वही अब उनके लिए कैदखाना बन चुका था। महीनों से न कपड़े बदले थे, न शरीर पर मांस का लोथड़ा बचा था। घर में गंदगी, अव्यवस्था और स्वास्थ्य की ऐसी अनदेखी थी कि टीम के सदस्य भी ठिठक गए।

ऑस्ट्रेलिया में सेटल्ड औलाद, पर पिता के लिए वक्त नहीं

इस कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि बुजुर्ग डॉक्टर न तो बेसहारा थे और न ही गरीब। उनके बेटा और बेटी दोनों ऑस्ट्रेलिया में शानदार जिंदगी बिता रहे हैं। लेकिन विडंबना देखिए, जिस पिता ने उन्हें काबिल बनाया, उन्हीं का हाल जानने के लिए उनके पास एक फोन कॉल तक का समय नहीं था। बताया जा रहा है कि डेढ़ साल से बच्चों ने पिता की सुध नहीं ली, जिससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह टूट गए।

पड़ोसियों ने बचाई जान

जब आसपास के लोगों को डॉक्टर साहब के घर से कोई हलचल सुनाई नहीं दी और उनकी दयनीय स्थिति का अंदाजा हुआ, तो उन्होंने एक सामाजिक संस्था को सूचना दी। रेस्क्यू का जो वीडियो सामने आया है, वह रोंगटे खड़े करने वाला है। उसमें संस्था के लोग हड्डियों का ढांचा बन चुके बुजुर्ग को चादर में उठाकर ले जाते दिख रहे हैं। लाचारी का आलम यह था कि वे बीमारियों से घिरे हुए थे और खुद पानी पीने तक की स्थिति में नहीं थे।

समाज और सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर बुजुर्गों की सुरक्षा और नैतिक मूल्यों पर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि जो बच्चे अपने माता-पिता को इस हाल में छोड़ देते हैं, उन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि सरकार को ऐसे सख्त कानून बनाने की मांग भी रख रहे हैं। बीते दिनों सोशल मीडिया पर जब यह वीडियो वायरल हुई थी, तब भी लोगों में खूब रोष दिखा।

Manoj Kumar
मनोज कुमार author

मनोज कुमार को टीवी पत्रकारिता में काम करने का 20 साल का अनुभव है. वर्तमान में वह Times Now नवभारत में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. 20... और देखें

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