जयपुर

3 करोड़ बकाया चुकाया नहीं...फिर कैसे दे सकते हैं सचिवालय कैंटीन का नया टेंडर; राजस्थान HC ने जारी की नोटिस

राजस्थान हाईकोर्ट में सचिवालय कर्मचारी संघ द्वारा संचालित सचिवालय कैंटीन का टेंडर बिना कानूनी प्रक्रिया के नई फर्म को दिए जाने के मामले में आगामी सुनवाई तय हुई। याचिकाकर्ता का कहना है कि फर्म के लगभग 3 करोड़ रुपये विभिन्न विभागों में बकाया हैं, जिनका भुगतान किए बिना कैंटीन खाली करवाने का आदेश दिया गया।

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राजस्थान हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

जयपुर : राजस्थान हाईकोर्ट ने सचिवालय कर्मचारी संघ की ओर से संचालित सचिवालय कैंटीन का टेंडर बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए नई फर्म को देने पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह रोक आगामी सुनवाई तक लागू रहेगी। मामले में मुख्य सचिव, कार्मिक सचिव और उप सचिव को 30 मई तक जवाब देने का निर्देश दिया गया है। याचिकाकर्ता फर्म ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी कि उन्हें 26 अगस्त 2019 के आदेश के तहत पांच साल के लिए कैंटीन चलाने की मंजूरी मिली थी, लेकिन सचिवालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष ने बिना आरटीपीपी एक्ट का पालन किए गुपचुप तरीके से टेंडर प्रक्रिया पूरी कर नई फर्म को टेंडर दे दिया। 23 अप्रैल 2025 को याचिकाकर्ता फर्म को कैंटीन खाली करने का नोटिस दिया गया और 28 अप्रैल को कैंटीन का ताला तोड़कर उनका सामान बाहर निकाला गया।

फर्म के लगभग 3 करोड़ रुपये बकाया

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उन्हें केवल पांच दिन का समय दिया गया और उनके कर्मचारियों को धमकाया गया। साथ ही, फर्म के लगभग 3 करोड़ रुपये विभिन्न विभागों में बकाया हैं, जिनका भुगतान किए बिना कैंटीन खाली करवाने का आदेश दिया गया। याचिकाकर्ता ने नई टेंडर प्रक्रिया में शामिल किए जाने का भी आग्रह किया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला देते हुए नई फर्म को टेंडर देने पर रोक लगा दी है। यह मामला सचिवालय कैंटीन के संचालन और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी नियमों के पालन से जुड़ा है। लिहाजा, कैंटीन के नए टेंडर को जारी करने में अभी और समय लग सकता है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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