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गोरखपुर में गो-तस्करों ने कैसे की NEET के छात्र दीपक की निर्मम हत्या ? जानिए मर्डर की पूरी टाइमलाइन

गोरखपुर में नीट की तैयारी कर रहे 19 वर्षीय छात्र की हत्या के बाद इलाके में तनाव है। दीपक की हत्या में शामिल एक आरोपी तस्कर का फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है। दीपक के परिजनों ने दीपक के हत्यारों को कड़ी सजा देने की मांग की है। जानिए मर्डर की पूरी टाइमलाइन।

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सोमवार को पशु तस्करों ने दीपक की हत्या कर दी दी थी

नई दिल्ली: गोरखपुर में नीट की तैयारी कर रहे 19 वर्षीय छात्र की हत्या के बाद इलाके में तनाव है। दीपक की हत्या में शामिल एक आरोपी तस्कर का फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है। दीपक के परिजनों ने दीपक के हत्यारों को कड़ी सजा देने की मांग की है। सोमवार को पशु तस्करों ने गोली मारकर दीपक गुप्ता नाम के छात्र की हत्या कर दी। हमलावरों ने उसके मुंह में गोली मारी और अपनी गाड़ी से उसका सिर कुचल दिया। इसके बाद आरोपियों ने शव को उसके घर से चार किलोमीटर दूर फेंक दिया था।

गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राज करन नैयर ने इस मामले में पिपराइच थाने की जंगल धूसर पुलिस चौकी के प्रभारी और पूरे स्टाफ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने और मनमानी के आरोप में की गई है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त सूचना के मुताबिक पुलिस चौकी के सभी निलंबित कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिये गये हैं।

मर्डर की टाइमलाइन

घटनाओं का सिलसिला सोमवार देर रात शुरू हुआ जब दो पिकअप वैन में 10-12 तस्कर आए और कथित तौर पर दुर्गेश गुप्ता की फर्नीचर की दुकान तोड़ने की कोशिश की। दुकान की ऊपरी मंजिल पर एक ट्रैवल एजेंसी थी जहां एक रिश्तेदार सो रहा था। शटर तोड़ने की आवाज़ सुनकर, उसने दुर्गेश के बेटे दीपक को सूचित किया।

भागते हुए तस्करों ने गोलियां चलाई

दीपक शोर मचाते हुए स्कूटर से मौके पर पहुंचा और लगभग 10-15 गांव वाले उसके पीछे दौड़े। घबराकर तस्करों ने गोलियां चला दीं और भागने की कोशिश की। अफरा-तफरी में, उन्होंने दीपक को अपनी एक गाड़ी में घसीट लिया और भाग निकले। करीब एक घंटे तक बदमाश गाड़ी चलाते रहे। तस्करों ने दीपक को चलती कार में फेंक दिया था। घर से करीब 4 किमी दूर दीपक को फेंक दिया था। गिरने के बाद दीपक का सिर एक पत्थर से टकराया। इस बीच दीपक बुरी तरह घायल हो गया और उसकी मौत हो गई।

एक घायल तस्कर का अस्पताल में चल रहा इलाज

पुलिस के अनुसार इस विवाद में ग्रामीणों की पिटाई से एक तस्कर गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों के पथराव में पुलिस का एक अधिकारी भी घायल हो गया। मंगलवार तड़के युवक की मौत की खबर फैलते ही तनाव उत्पन्न हो गया। गुस्साये ग्रामीणों ने गोरखपुर-पिपराइच मार्ग जाम कर दिया, पुलिस पर पथराव किया और यातायात ठप कर दिया। वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन के बाद पांच घंटे बाद जाम हटाया जा सका। मौके पर पुलिस बल और पीएसी तैनात कर दी गई है।

इलाके में दीपक की हत्या के खिलाफ आक्रोश

इस बीच, गांव वालों ने एक तस्कर को पकड़ लिया, उसकी गाड़ी में आग लगा दी और उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी। जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और घायल व्यक्ति को बचाने की कोशिश की, तो स्थानीय लोगों ने उन पर पथराव किया और झड़प भी हुई। इस झड़प में एसपी (उत्तर) जितेंद्र श्रीवास्तव और पिपराइच एसएचओ गंभीर रूप से घायल हो गए।बाद में पुलिस ने लगभग चार किलोमीटर दूर दीपक का खून से लथपथ शव बरामद किया, जिससे इलाके में आक्रोश फैल गया। इसके बाद करीब पांच घंटे तक यातायात बाधित रखा। (एजेंसी इनपुट के साथ)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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