हरियाणा में पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर सोशल मीडिया पर सियासी संग्राम का कारण बन गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने हरियाणा भाजपा को खुली चुनौती देते हुए पूछा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में ऐसी कौन-सी भर्ती परीक्षा है, जो पेपर लीक या भर्ती विवाद से अछूती रही हो। इसके जवाब में हरियाणा भाजपा ने AAP पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही भाजपा ने अपनी सरकार की भर्ती प्रक्रिया को सबसे अच्छा मॉडल बताया। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, लेकिन इस राजनीतिक लड़ाई के बीच सबसे बड़ा सवाल हरियाणा के लाखों बेरोजगार युवाओं का है, जिनकी मेहनत और भविष्य बार-बार भर्ती विवादों की भेंट चढ़ता दिखाई देता है।
आम आदमी पार्टी का आरोप है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में 30 से ज्यादा भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक या गंभीर अनियमितताओं के आरोपों में घिरीं। इनमें ग्राम सचिव भर्ती, क्लर्क भर्ती, बिजली विभाग क्लर्क, एक्साइज इंस्पेक्टर, एग्रीकल्चर इंस्पेक्टर, कंडक्टर भर्ती, आईटीआई ट्रेनर, नायब तहसीलदार, HTET, पुलिस कांस्टेबल, पटवारी, TGT, डेंटल सर्जन, स्टेनो टाइपिस्ट, UDC, जूनियर ड्राफ्ट्समैन और अन्य कई भर्तियों का नाम लिया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि हर बार पेपर लीक की खबर आने के बाद परीक्षा रद्द हुई, जांच बैठी, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान उन युवाओं का हुआ, जिन्होंने सालों तक तैयारी की थी।
20 करोड़ से ज्यादा खर्च फिर भी पेपर लीक
विपक्ष यह भी सवाल उठा रहा है कि भर्ती परीक्षाओं की गोपनीयता और सुरक्षा पर हर साल 20 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद बार-बार पेपर लीक और भर्ती विवाद सामने आने का मतलब क्या है? अगर व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है तो बार-बार परीक्षाओं पर सवाल क्यों उठते हैं? AAP ने पूछा- युवाओं का समय, पैसा और मानसिक दबाव कौन लौटाएगा?
पंजाब की खामियों पर ध्यान दे AAP: भाजपा
दूसरी ओर, हरियाणा भाजपा इन सभी आरोपों को राजनीतिक प्रचार बता रही है। पार्टी का कहना है कि भाजपा सरकार ने मेरिट के आधार पर लाखों युवाओं को बिना सिफारिश और बिना रिश्वत नौकरी दी है। भाजपा का आरोप है कि आम आदमी पार्टी हरियाणा की उपलब्धियों से ध्यान हटाने के लिए भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। भाजपा का कहना है कि पहले AAP को पंजाब में भर्ती, कानून-व्यवस्था और नशे जैसे मुद्दों पर जवाब देना चाहिए।
भर्ती रद्द होने का खामियाजा अभ्यर्थी चुकाते हैं
लेकिन सोशल मीडिया पर बहस अब सिर्फ AAP और BJP तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में युवा यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर हर भर्ती के साथ विवाद क्यों जुड़ जाता है। किसी की उम्र निकल जाती है, कोई सालों तक तैयारी करता है, कोई परिवार की उम्मीदों के साथ परीक्षा देता है, लेकिन जब भर्ती रद्द होती है या जांच के घेरे में आती है तो सबसे बड़ी कीमत मेहनतकश अभ्यर्थी ही चुकाता है।
आज हरियाणा का युवा नेताओं से भाषण नहीं, बल्कि भरोसा मांग रहा है। उसे ऐसी भर्ती व्यवस्था चाहिए, जिसमें परीक्षा समय पर हो, पेपर सुरक्षित रहे, दोषियों को तुरंत सजा मिले और ईमानदार अभ्यर्थियों की मेहनत पर किसी पेपर लीक माफिया का साया न पड़े। राजनीतिक बयानबाजी अपनी जगह है, लेकिन युवाओं का सवाल आज भी वही है, क्या हरियाणा में नौकरी की परीक्षा मेहनत से जीती जाएगी या फिर हर बार पेपर लीक की खबर ही सुर्खियां बनेगी?
